राजपूताना स्वाभिमान बना हलाल हत्या का सबब सूर्या का तीन जेहादियों ने छूरों से किया हलाल

Loading

चंडीगढ सोमवार 01.06.2026 अल्फा न्यूज इंडिया प्रस्तुति—-बकरीद पर बकरा हलाल करने के बाद नवयुवक असद के मन मे इच्छा जागु कि क्यों ना किसी काफिर को भी आज कलम कर दिया जाये, ताकि दोगुना शबाब मिले और ऊपर जाकर हूरों की बुकिंग पक्की हो जाये।उसे ध्यान आया कि कुछ दिन पहले सूर्या राजपूत उसकी तरफ नजर उठाकर चला था,उसने फ़ोन करके सूर्या को बुलाया तो सूर्या और उसका साथी उसकी गली में गये।वहाँ बकरा काटकर जवानी के जोश में भरे बैठे असद ने सूर्या को पूछा – कभी बकरा कटते हुए देखा है ? सूर्या ने कहा – नहीं…असद बोला – मैं दिखाता हूँ…इसके बाद छुरी से सूर्या पर ताबड़तोड़ वार कर दिए इसमें असद अकेला नहीं था बल्कि उसके कुछ साथी भी संग थे।क्या दुश्मनी थी असद की सूर्या से, कुछ नहीं…बस इतना कि असद किसी काफिर को मारना चाहता था और उसे सूर्या का राजपूती अन्दाज पसन्द नहीं था।पुनः इन काफिरों को समझना चाहिए कि यह त्यौहार कोई बलि या कुर्बानी नहीं है, बल्कि एक अभ्यास है कि कैसे बेझिझक, निडर होकर किसी जीव का गला काटा जाये और खून-मांस देखकर उल्टियां करने वाले काफिर इनका आसान निशाना है।असद की उम्र भी 19-20 साल होगी,इतनी कम उम्र में मजहबी कट्टरता से लबरेज असद अकेला नहीं है, उसे जैसे लाखों 10-12 साल के बच्चे जिहाद के सिपाही बने घूम रहे हैं, सेकेंडो में काफिर को मार डालना चाहते हैं।इनको ये जिहाद कौन सिखा रहा है…गली-गली घूमते जमाती और दढ़ियल मौलाना, हर समय केवल खुदा, जन्नत-दोज़ख और काफिर रहता है जुबान पर।एक काल्पनिक दुनिया के चक्कर मे कितने ही बेगुनाहों को मार डाला इन जाहिलों ने, पूरी दुनिया इनकी काल्पनिक लोक की चाह के कारण जल रही है।जिसे देखा नही उस जन्नत के लिए उपलब्ध धरती को लाल कर रहे हैं।साभार : चौधरी सुमित सिंह जसोई llll

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

748221

+

Visitors