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चंडीगढ़ शनिवार 26/09/2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा —- व्रत उपवास और पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति खुशी समृद्धि तभी आएगी जब एक पतिव्रता स्त्री शिष्टाचार और अनुशासन का घर में पूर्णतया पालन करेगी। पति ही परमेश्वर है यह ऐआई ने नहीं बल्कि सनातनी हिंदू शास्त्रों ने कहा था। पतिव्रता पत्नी के लिए शास्त्र सम्मत कुछ नियमावली हैं। अपने पति के साथ मधुर व्यवहार नेक नियति शिष्टाचार भरे मीठे व्यवहार से अनुशासित जीवन यापन करना चाहिए। कभी किसी के सामने अपने पति को नीचा मत दिखाओ। क्योंकि पति का मन ही पत्नी का गहना होता है। उदाहरण के भगवान विष्णु जी के दिल में मां लक्ष्मी जी वास करती हैं जो हमेशा भगवान विष्णु जी के चरण दबाती रहती हैं । और सांसारिक जीवन में पति-पत्नी भी भगवान की ही प्रति छाया कही जाती है। पति की कमाई की मंगलकामना करो। वह कितना कमा कर लाए हैं इसका सम्मान करें। और दूरदर्शी बनकर सदुपयोग करें। घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं आएगी। कड़वे वचन मत कहें । क्योंकि घर का सुख हमेशा पति से सद्व्यवहार से बनता और बढ़ता है। बात बात पर झगड़ा मत करो । कटु वचन मत बोलो क्योंकि घर का सुख हमेशा पति से मीठा बोलने से ही नियमित स्थापित रहता है। सत्य वचन यही है कि एक विवाहिता सुहागिन स्त्री चाहे जितनी भी संस्कार निष्ठावान बनने के लिए उसे अपने पति के साथ तीन धर्म पूरे करने चाहिएं। इससे पत्नी का आत्म सम्मान आत्मचिंतन और आत्मशौर्य यश कीर्ति आदि भी बढ़ेगा।।


