आरज़ू है रब से, ना जाने कब से
रात अंधेरी में याद तेरी में रुह मेरी में इंतजाम देरी में ख्वाबों की ढेरी में बेचैनी की बेरी में कविता की कावेरी में संधली सवेरी में हुस्न की हेराफेरी में इश्क की इंतहा में रजामंदी की राहों में सब्र आर है न पार मुहब्बत बेशुमार है रुठ न परवाने से राज दीवाने से आशिक…

