‘प्रवासी गैंगस्टर्स’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को करते गुमराह बेरोजगार युवाओं को लालच देकर अपराध की राह पर धकेलते

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चंडीगढ़ लुधियाना शनिवार ०1 जुलाई २0२6–अनिल विज-विदेशों में स्थित गैंगस्टर और आपराधिक गिरोह अब सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पंजाब के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जल्दी पैसा कमाने की लालसा, बेरोजगारी, विदेश जाने की इच्छा और आसान कमाई के सपने कई युवाओं को अपराध की दुनिया की ओर धकेल रहे हैं। हाल के मामलों से संकेत मिलता है कि सीमा पार स्थित सरगना अब केवल फिरौती या गिरोहवार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि संवेदनशील स्थानों की रेकी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों के लिए स्थानीय युवाओं का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। एजेंसियों के अनुसार, गैंगस्टर पहले सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती करते हैं, फिर व्यक्तिगत बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतते हैं। शुरुआत में, पैकेट पहुंचाने, सिम कार्ड या बैंक खाते उपलब्ध कराने या किसी स्थान की रेकी जैसे कामों के बदले अच्छी खासी रकम दी जाती है। कई युवाओं को यह भी पता नहीं होता कि वे एक आपराधिक नेटवर्क के लिए काम कर रहे हैं। एक या दो बार पैसा मिलने के बाद, उन्हें बड़े अपराधों में धकेल दिया जाता है, जिनसे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बेरोजगारी, नशीली दवाओं की लत और सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली विलासिता युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रही है।जीवन की चकाचौंध इस समस्या को और भी गंभीर बना रही है। विदेशी गैंगस्टर इन कमजोरियों का फायदा उठाते हैं और युवाओं को आसानी से मिलने वाले धन का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं और बाद में उनका इस्तेमाल गंभीर अपराधों के लिए करते हैं।दान सिंह वाला का मामलाबठिंडा के दान सिंह वाला गांव के एक गरीब परिवार के युवक को पाकिस्तानी आपराधिक गिरोह ने सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसा लिया। उसे विदेश से पैसे भेजे गए ताकि वह एक महंगा मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल खरीद सके। पुलिस जांच में पता चला कि इन पैसों का इस्तेमाल जम्मू में किसी सेना अड्डे या काफिले पर हमले की योजना बनाने के लिए किया जाना था।कुछ हजार रुपयों के लिए पेट्रोल बम से हमला22 जून, 2026 को, बठिंडा में भाजपा नेता डॉ. तरसेम गर्ग के क्लिनिक पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में पता चला कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क ने स्थानीय युवाओं को कुछ हजार रुपये का लालच देकर मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया था।आर्मी रेकी का शुल्क 13 हजार रुपये है।बठिंडा-मालोट सड़क पर सैन्य गतिविधियों पर नजर रखें।इस उद्देश्य से लगाए गए सोलर कैमरे के मामले में, मुख्य आरोपी नीमू को कथित तौर पर केवल 13,000 रुपये मिले। पुलिस के अनुसार, कैमरा एक विदेशी नेटवर्क से जुड़ा था और इस साजिश में चार लोग शामिल थे।एक ही नेटवर्क से जुड़ी कई घटनाएं16 मार्च 2025 को जालंधर में एक यूट्यूबर के घर पर ग्रेनेड फेंका गया।नवंबर 2025 में सिरसा महिला पुलिस स्टेशन पर हुए विस्फोट, जनवरी 2026 में अंबाला कार बम विस्फोट और 6 मई 2026 को जालंधर में सुरक्षा बलों के मुख्यालय के पास हुए विस्फोट से विदेशी हैंडलर्स और स्थानीय युवाओं के इस्तेमाल का एक पैटर्न सामने आया। इसके तीन प्रमुख कारण हैं।बेरोजगारी: योग्यता के अनुरूप रोजगार की कमी के कारण, कई युवा आसान कमाई के लालच में फंस जाते हैं। नशाखोरी: नशे की लत को पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत।सोशल मीडिया: गैंगस्टरों की स्थिति, हथियारयह कई युवाओं को अपराध की ओर धकेल देता है। दिखावा और झूठी प्रसिद्धि युवाओं को प्रभावित करती है, जिसका विदेशी सरगना फायदा उठाते हैं। विशेषज्ञ की रायडीएसपी सतवंत सिंह बैंस का कहना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। परिवारों, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को भी युवाओं को जागरूक करना होगा। यदि कोई अज्ञात व्यक्ति ऑनलाइन पैसे या संदिग्ध काम की पेशकश करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए। साभार।।

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