ब्रह्मज्ञान को जानना ही मुक्ति नहीं उसे प्रतिपल जीना वास्तविक मुक्ति
चण्डीगढ़/समालखा:- 16 अगस्त:-आरके विक्रमा शर्मा/ अनिल शारदा/ हरीश शर्मा+ एनके धीमान प्रस्तुति:—– ‘‘ब्रह्मज्ञान को जीवन का आधार बनाकर निरंकार से जुड़े रहना और मन में उसका प्रतिपल स्मरण करते हुए, सेवा भाव को अपनाकर जीना ही वास्तविक भक्ति है। पुरातन संतों एवं भक्तों का जीवन भी ब्रह्मज्ञान से जुड़कर ही सार्थक हो पाया हैं। यह…

