चितकारा यूनिवर्सिटी कलह क्लेश और पुलिस मुस्तैदी लखविंदर सरीन की जुबानी

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चंडीगढ़ पटियाला रविवार 27/09/2026 अल्फा न्यूज़ इंडिया प्रस्तुति —- जिला पटियाला में राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में बीती निकली रात हुई घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो और बातें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे घटनाक्रम को समझें।कस्तूरबा चौकी इंचार्ज अजय कुमार जी को रात करीब 2 से 2:30 बजे राजपुरा कंट्रोल रूम से चितकारा यूनिवर्सिटी पहुंचने का फोन आया। जानकारी के अनुसार, वह तुरंत अपनी गाड़ी खुद चलाकर मौके पर पहुंचे।वहां हालात तनावपूर्ण थे और पुलिस के कई जवान घिरे हुए थे। अजय कुमार जी ने एक-एक करके अपने साथियों को वहां से बाहर निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि जब बाकी पुलिसकर्मी बाहर निकल गए, तब अजय कुमार जी खुद अंत में वहां फंस गए।अब सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के कुछ सेकंड देखकर किसी पुलिस अधिकारी के चरित्र, नीयत या व्यक्तिगत आचरण पर सवाल खड़े करना कितना उचित है—यह सोचने वाली बात है।जो व्यक्ति रात के उस समय ड्यूटी के बुलावे पर खुद गाड़ी चलाकर मौके पर पहुंचता है और अपने साथियों को सुरक्षित निकालने के बाद स्वयं अंत में वहां रह जाता है, उसके पूरे घटनाक्रम को समझे बिना उस पर आरोप लगाना उचित नहीं है।अजय कुमार जी ने अपने जीवन में जो भी मुकाम हासिल किया है, वह उनकी मेहनत, लगन और ईमानदारी से हासिल किया है। पुलिस के साथ विद्यार्थियों द्वारा किए गए किसी भी दुर्व्यवहार की मैं स्पष्ट रूप से कड़ी निंदा करता हूं।विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा होती है और वर्दी की भी अपनी गरिमा होती है।मेरा आग्रह है—वीडियो के आधार पर फैसला नहीं, पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो।सच्चाई सामने आए और जो भी सही हो, उसके साथ न्याय हो।वर्दी के पीछे भी एक इंसान होता है—उसके सम्मान को भी समझना जरूरी है। 🙏मैं पंजाब पुलिस के इस मुलाजिम का समर्थन करता हूं, और बच्चों को के ज्यादातर दूसरे राज्यों के है उनको भी आगाह करता हूं जिस काम के लिए पंजाब आए हो वो पढ़ाई करो और चलते बनो, ऐसे पुलिस पर और वो भी एक मुलजिम पर हाथ उठाने का कोई मतलब नहीं है।

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