नवीन नीर की समाज को सेंध देती दो कविताएं
❤️🔥❤️🔥❤️🔥 परायेपन की इस हद तक रवायत देख ली मैंने बची है पास अब किसके मुरव्वत देख ली मैंने निकल के आ गया हूँ मैं तेरी बेमानी चाहत से मुहब्बत करने वाले की मुहब्बत देख ली मैंने सभी इल्ज़ाम हैं मुझपर सभी इल्ज़ाम हैं जायज़ शिकायत में छुपी उसकी इनायत देख ली मैंने ये सारी…

