गणों के अधिपति देव गणेश जी की महिमा अपरम्पार

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चंडीगढ़ सोमवार 19 अक्टूबर 2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा—“उच्छिष्ट गणपतिउच्छिष्ट गणपति” श्री गणेश का एक तांत्रिक स्वरूप है, जिसका वर्णन विभिन्न आगमिक और तांत्रिक परंपराओं में मिलता है। उनके नाम में “उच्छिष्ट” शब्द का संबंध तांत्रिक परंपरा में सामान्य सामाजिक शुद्ध-अशुद्ध की सीमाओं से परे जाने वाले आध्यात्मिक सिद्धांत से है।उनका स्वरूप विभिन्न ग्रंथों में अलग-अलग मिलता है। षड्भुज (छः-भुज) रूप के एक वर्णन में उनके हाथों में कमल, अनार, वीणा, अक्ष-माला और धान की बालियाँ बताई गई हैं।उनके साथ विराजमान शक्ति को विघ्नेश्वरी (Vighneśvarī) कहा गया है। उत्तर-कामिकागम में उन्हें अलंकृत, युवा देवी के रूप में वर्णित किया गया है।यह स्वरूप गणपति और शक्ति की अभिन्नता तथा तांत्रिक साधना में चेतना और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है।॥ श्री उच्छिष्ट गणपतये नमः ॥▲ गणपति बप्पा मोरयाllll

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