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चंडीगढ़ बटाला रविवार 09/08/2026 आरके विक्रमा शर्मा बीरबल शर्मा करण शर्मा —– भारत ऋषि मुनियों तपतिया तपस्वियों पीरों फकीरों की प्रिय तपो स्थली है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तो देवभूमि ही है। इसी श्रेणी में पंजाब भी साधु संतों फक्कर फकीरों की तप साधना नाम जप भूमि मानी पहचानी जाती है। पंजाब पाकिस्तान और हिंदुस्तान संयुक्त के दौर में भगवान श्री रामचंद्र जी महाराज के छोटे पुत्र कुश महाराज द्वारा स्थापित हिंदू कुश पर्वत क्षेत्रों तक फैला हुआ था। पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब में बाबा नानक जी ने सनातनी हिंदू मेहता परिवार में पिता कल्याण चंद मेहता माता तृप्ता के घर अवतार लिया था। उनकी बहन का नाम बीबी नानकी था। बाबा नानक जी के दो पुत्र श्रीचंद और लखमी चंद थे। दोनों में से किसी को भी गुरु गद्दी प्राप्त नहीं हुई थी। गुरु नानक देव जी ने उदासी यात्राओं के दौरान पंजाब के जिला बटाला से 12 किलोमीटर दूर नागियां साब में विश्राम किया था। यहीं तपती दोपहर में विश्राम कर रहे बाबा नानक पर फंड धारी नाग ने छाया की थी। और यही नाग बचपन से बाबा नानक देव जी के साथ रहता था। जिसे बाबा नानक ने नागिआना में ही रुकने का आदेश दिया था। हालांकि इस पर एक मत अभी तक नहीं है। यहां आज भी बडा गुरुद्वारा साहब है। और अब तो इसकी नई इमारत भी बन रही है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर दर्शन करने आते हैं। यहां एक पवित्र बाऊली है जिसमें स्नान किया जाता है। मनोकामना मन्नत पूरी होने पर सिख पंथ के श्रद्धालु यहां पर नाग की अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार धातु की नाग मूर्ति चढ़ाते हैं। बाऊली सरोवर में से आज भी लोग जल घर लेकर जाते हैं। यह जल कितने समय तक सुरक्षित स्वच्छ रहता है इसकी तो जानकारी नहीं उपलब्ध है। पर संगत में खूब आस्था है कि जल के स्नान से अनेकों रोग व्याधियों और चर्म रोग से मुक्ति मिलती हैं।


