कारगिल हीरो विख्यात नायक दिगेंद्र कुमार की वीरता की कहानी बहादुरी की जुबानी

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चंडीगढ /जैसलमेर शुक्रवार 19/06/2026 आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा अनिल शारदा चंद्र भान सोलंकी—– जय भारत माता आपको सदा ही अल्फा न्यूज इंडिया का प्रणाम है..कारगिल हीरो के नाम से विख्यात नायक दिगेंद्र कुमार की कहानी किसी फिल्म के हीरो से कम नहीं है। उन्होंने 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मारकर न केवल देश को बड़ी कामयाबी दिलाई बल्कि पांच गोलियां लगने के बावजूद पाकिस्तानी मेजर की ग’र्दन का’टते हुए तोलोलिंग की चोटी पर तिरंगा फहराया। कौन हैं मेजर दिगेंद्र सिंह …महानायक दिगेंद्र कुमार महावीर चक्र विजेता है। उन्होंने करगिल युद्ध के समय जम्मू कश्मीर में तोलोलिंग पहाड़ी की बर्फीली चोटी को पाकिस्तानी घुसपैठियों से आजाद करवाकर 13 जून, 1999 की सुबह तिरंगा लहराते हुए भारत को पहली जीत दिलाई थी। करगिल युद्ध के दौरान दिगेंद्र को 5 गोलियां लगी थीं, फिर भी उन्होंने 48 पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को मा’र गिराया था। 1985 में राजस्थान राइफल्स में भर्ती हुए दिगेंद्र : 03 जुलाई, 1969 को राजस्थान के सीकर जिले में जन्मे दिगेंद्र 1985 में राजस्थान राइफल्स 2 में भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध मे तोलोलिंग पहाड़ी पर कब्जा करना बेहद जरूरी था और इस काम की जिम्मेदारी राजपूताना राइफल्स को सौंपी गई थी। इस पर जनरल मलिक ने राजपूताना राइफल्स की टुकड़ी से तोलोलिंग पहाड़ी को आजाद कराने की योजना पूछी। तब दिगेंद्र ने कहा, मेरे पास एक आइडिया है, जिससे जीत हमें ही मिलेगी।पाकिस्तानी बंकर पर फेंका था हथगोला :—-हालांकि, ये काम इतना आसान भी नहीं था। क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने ऊपर चोटी पर 11 बंकर बना रखे थे। इसके साथ ही पहाड़ी पर पड़ी बर्फ की वजह से उस पर चढ़ना और भी कठिन था। लेकिन बहादुर दिगेंद्र साथियों के साथ दुश्मन के बंकर के पास पहुंच गए। उन्होंने बंकर पर एक हथगोला फेंका, जिससे पहला बंकर ध्वस्त हो गया। हालांकि, इससे पाकिस्तानी सेना अलर्ट हो गई।बुरी तरह जख्मी होने के बाद भी दुश्मन से लड़ते रहे :
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से जवाबी फायरिंग होने लगी। इस फायरिंग में दिगेंद्र के सीने में तीन गोलियां लगीं। इसके साथ ही उनका एक पैर भी बुरी तरह जख्मी हो गया। लेकिन इसके बाद भी दिगेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने जख्मी हालत में ही पाकिस्तान के बाकी बचे 10 बंकरों में 18 हथगोले फेंके और सारे बंकर नष्ट कर दिए। पाकिस्तानी सेना मेजर अनवर खान की उड़ाई गर्दन : उधर दिगेंद्र कुछ साथियों के साथ आगे बढ़ते रहे और बीच-बीच में स्टेरॉयड युक्त पेनकिलर के इंजेक्शन का इस्तेमाल करते रहे। ऐसा करके दिगेंद्र और उनकी टीम ने पूरे 11 बंकर तबाह कर दिए थे। इस बीच, सुबह चार बजे उनके आखिरी साथी सरदार सुमेर सिंह राठौड़ को भी गोली लग चुकी थी। फिर उसकी एलएमजी लेकर दिगेंद्र पहाड़ी की ओर आगे बढ़े, तब उन्हें रास्ते में पाकिस्तानी सेना मेजर अनवर खान दिखाई दिया। दोनों का आमना-सामना हुआ तो दिगेंद्र एलएमजी से एक ही गोली चला पाए थे, तभी अनवर खान ने उन पर अपनी पिस्तौल से गोली दागी जो दिगेंद्र के कमर के नीचे पांव में लगी। तभी उसकी गोलियां खत्म हो चुकी थी। इसके बाद अनवर ने दिगेंद्र के ऊपर झपट्टा मारा लेकिन दिगेंद्र ने उसका गला पकड़ कर रखा और अपना खंजर निकालकर झटके से उसकी गर्’दन उ’ड़ा दी। इसके बाद दिगेन्द्र लड़खड़ाते हुए ही तोलोलिंग पहाड़ी की चोटी पर पहुंचे और वहां तड़के 4 बजे तिरंगा फहरा दिया। जब वाजपेयी बोले- वाह! मेरे कलियुगी भीम बेटे, तुमने 48 को मारा
सवेरा होने वाला था, 13 जून, 1999 को सुबह के साढ़े चार बजे थे। तोलोलिंग की चोटी पर तिरंगा लहराने लगा था। नायक दिगेंद्र अपनी इस जीत से ज्यादा उत्साहित नहीं थे, वे अपने साथियों को खो देने के कारण अंदर से टूट चुके थे। वे गंभीर घायल थे, रो रहे थे। उसके बाद उन्हें कुछ याद नहीं। जब उनकी आंख खुली तो वे श्रीनगर के सैन्य अस्पताल में थे। दिगेंद्र बताते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि उन्होंने कितनों को मारा। इसका पता तब चला, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी पीठ थपथपाकर कहा कि वाह मेरे कलियुगी भीम बेटे, तुमने 48 को मारा। दो और मार देते तो हाफ सेंचुरी लग जाती। तुम अभी भी नॉट आउट हो। हालांकि, इसके बाद दिगेंद्र कुमार का उपचार दो-तीन साल तक चलता रहा और बाद में वे अनफिट करार दिए जाने के बाद सेना से रिटायर हो गए। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया। कोबरा दिगेंद्र कुमार देश का वह नायक जिन्हें 30 साल की उम्र में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने देश दूसरे सबसे बड़े गैलेंट्री अवॉर्ड महावीर चक्र से नवाजा था। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी टीम के सहयोग से 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मारकर न केवल देश को बड़ी कामयाबी दिलाई बल्कि पांच गोलियां लगने के बावजूद पाकिस्तानी मेजर की ग’र्दन का’टते हुए तोलोलिंग की चोटी पुन: फतह की और 13 जून की प्रभात बेला में तिरंगा लहरा दिया।💐🇮🇳💐🇮🇳

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