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चंडीगढ़ रविवार 14.6.2026 एम आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति—– सोशल मीडिया पर सर्वाधिक वायरल होने वाली पोस्ट पर मिलाजुला नकारात्मक और सकारात्मक सोच पढ़ने को मिल रही है. देश पहले बाकी सभी बाद में जीवन मे स्थान रखते हैं. क्या पंजाबी हिन्दू और सिख मन मते के लोगों को इस भयावह त्रासदी के बारे में तथ्यों par आधारित जानकारी प्राप्त है. खालिस्तान के नाम… सिख़ अलगाव की कीमत जानते हैं, 35 हज़ार से ज्यादा हिन्दुओं की ह@ त्या और
- 50/55 हज़ार सिखों की ह@ त्या
- हज़ारों औरतों बच्चियों के साथ कुकृत्य
- लोगों को बेघर, हज़ारों नौजवानों को आतंकवादी बनाकर मरवाया
और आज तक खालिस्तान के नाम पर लोगों का हो रहा है शोषण… - ……ये इस लिए हुआ के एक व्यक्ति “भिंडरावाले” को एक समाज ने अपना आदर्श बना लिया…
- आप जब भी किसी हिंसक और कट्टरपंथी और अपराधिक वृति के व्यक्ति को समाज का आदर्श बनाएंगे…. समाज के तौर पर यही कीमत चुकानी होगी!!! कमेंट्स की भी बानगी गागर में सागर भरने के तुल्य है….. बड़ी विडंबना है जिस व्यक्ति ने देश के टुकड़े करने के लिए अलगाववाद के लिए हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया आज देश के कुछ युवा उसको अपना आदर्श मान रहे हैं संप्रदाय विशेष के धार्मिक स्थानों पर उसके नाम की T शर्ट बिक रही है झंडे बिक रहे हैं…… पॉडकास्ट में यूट्यूब के ऊपर उसको संत की उपाधि दी जा रही है….. *हमारी जनता महामूर्ख है, 1984 BS (Blue Star) क्या सही था या गलत था ?? यह कोई मुद्दा ही नहीं है.. क्योंकि हर बार जनता को इसके “पक्ष या विपक्ष” में खडा कर दिया जाता है.. इसका “उचित जवाब” तो इस पोस्ट के अंत में बताया गया है..**क्योंकि 1986 & 1988 में “ब्लैक थंडर ऑपरेशन” 1&2 को स्वर्गीय श्री KPS गिल जी ने श्री हरिमंदिर साहिब जी (Golden Temple) में अंजाम दिया था, वही पुनः 84 वाली स्थिति एवं स्थान था..**परंतु जहां पूरी दुनिया में BS का “विरोध या समर्थन” होता रहता है, परंतु ब्लैक थंडर ऑपरेशन” 1&2 पर कोई चर्चा ही नहीं होती, 99% जनता को इन दोनों ऑपरेशन की कोई जानकारी ही नहीं है…**जैसे 90% जनता को निहंग सिंहों के दशम ग्रन्थ एवं सरबलोग ग्रंथ की कोई जानकारी ही नहीं है.. जिसमें सनातन धर्म के अवतारों का जिक्र है, जिनको सदगुरु भगवान श्री गोबिंद सिंह जी महाराज ने स्वयं लिखा है, इन दोनों ग्रंथों को जो लोग सिख पंथ से ही गायब कर सकते है, क्या वह फिर ब्लैक थंडर ऑपरेशन की जानकारी को गायब नहीं कर सकते..??**उदाहरण : मच्छर कॉकरोच खटमल आदि को मारना घर की स्वच्छता के लिए जरूरी है, इसमें कोई दो राय नहीं है, परंतु क्या उसके कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए या AK47 टैंक मिसाइल का उपयोग करना चाहिए.. पहले से कीड़े मकोड़े मरेंगे, दूसरे से घर ही उड़ जाएगा…**उद्देश्य क्या है ..?? जैसे घर को कीडे मकोड़ों से मुक्त करना, घर का ही सर्वनाश करना उद्देश्य नहीं है। ऐसे ही हरि मंदिर साहिब जी (Golden Temple) को आतंकियों से मुक्त करना था, गुरुघर को ही नुकसान पहुंचाना नहीं था…**यह बात स्वर्गीय श्री KPS गिल जी को समझ आ चुकी थी.. BS 84 में आतंकियों के खिलाफ टैंक रॉकेट आदि का उपयोग किया गया जो पूर्ण रूप से ग़लत था जबकि 86 & 88 में आतंकियों के खिलाफ “सर्जिकल स्ट्राइक” का उपयोग किया गया… जैसे URI में किया गया था..**पहले 86 & 88 में काफी दिनों तक बिजली पानी राशन को बंद कर दिया गया.. जिससे जनता ने धीरे धीरे गुरुद्वारे को खाली कर दिया, फिर बचे रह गए आतंकी, उनको धीरे धीरे सर्जिकल स्ट्राइक (ब्लैक कमांडो) द्वारा निपटा दिया गया.. बिना किसी नुकसान के गुरुद्वारे (हरि मंदिर साहिब जी/Golden Temple) को बचा लिया गया…* *शरीर में जब रोग हो जाए तो ऑपरेशन करना पड़ता है, निकम्मा डॉक्टर तो ऑपरेशन में रोगी को ही मार देता है, अगर रोगी बच भी जाए तो रोगी में कोई नई समस्या (बीमारी) खड़ी कर देते है.. अच्छा डॉक्टर तो ऑपरेशन से रोगी के रोग को मार देता है, उसको रोग से मुक्त कर देता है..**ऐसे ही BS ऑपरेशन करना बहुत जरूरी था, परंतु उसको पूर्ण रूप से “गलत ढंग” से किया गया था… यह महापाप स्वीकार करनी बहुत अधिक जरूरी है.. इसके लिए गांड़ू परिवार (गुप्त जिहादी, गुप्त मिजरी, गुप्त माओवादी, तीनों का खतरनाक मिश्रण/Deadly Cocktail of Poison) ही दोषी है.. जिसने जानबूझ कर ऐसा करवाया था क्योंकि मुगलों अंग्रेजो की औलादों से यही उम्मीद थी.. क्योंकि शुरुवात से ही उनका उद्देश्य कभी भी आतंकी को मारना नहीं था, क्योंकि भिंडीवाला तो उनका द्वारा ही खड़ा किया गया मोहरा था बल्कि H & S की एकता एवं आस्था के तीर्थस्थान को तोड़ना ही था… ताकि H & S की एकता को तोड़ा का सके…**उन्होंने कभी सोचा ही नहीं था कि मदिरा को यह खतरनाक खेल बहुत मंहगा पड़ जाएगा.. जब मदिरा मरी फिर उन्होंने इस मुद्दे को अपने राजनीतिक लाभ के लिए H-S बना दिया गया.. भाइयों ( H & S) को आपस में लडवा दिया गया.. S को बोला कि H के कहने पर मदिरा ने BS किया था.. H को बोला कि S ने “नापाक ISI” के कहने पर पंजाब में H का नरसंहार किया था… जबकि इसमें “नापाक ISI + नापाक को जन्म देने वाला “गुप्त जिहादी परिवार” ही दोषी है…**जवाब : BS ऑपरेशन तो पूर्ण रूप से “गलत ढंग” से किया गया ऑपरेशन था, इसलिए वह पूर्ण रूप से हमेशा से ही गलत कहा जाएगा..**जनता का जागरूक एवं एकजुट होना बहुत जरूरी है।*………भारत देश सिखों के बिना अधूरा हैं इन के साथ बड़ी पॉलिटिक्स खेली जा रही है वैसे ही हरियाणा में जाटों के साथ खेली जा रही है वैसी ही उत्तर प्रदेश में जाटों और यादव के साथ खेली जा रही है वैसी ही बिहार में यादव के साथ खेली जा रही है पूरे भारत में ओबीसी के साथ खेली जा रही है महाराष्ट्र में मराठी के साथ खेली जा रही है। क्योंकि यह मजबूत कास्ट हैं और उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा बनाकर दूसरी कैसन को खड़ा करना आसान है बाकी धर्म के बेस पर तो आप सब ने अच्छे से देख लिया होगा साउथ में अलग लैंग्वेज के हिसाब से पॉलिटिक्स खेली जा रही है यह सब ऐसी पॉलिटिक्स का शिकार है जिसकी कहावत है कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना। और यह सब भारत देश के राजनेता भी पॉलिटिक्स खेलते हैं और जब भारत इंटरनेशनल स्तर पर मजबूत हो जाता है तो कुछ बाहरी पावरफुल देश भारत के इंटरनल मुद्दों को उठाकर भारत की एकता को तोड़ने की बात करते हैं मैं सबसे यही रिक्वेस्ट करूंगा भारत के धरातल को समझो और यह हम सब भारतीयों का कर्तव्य बनता है कि हमें अपने सभी भारत के लोगों के व्यवहार का उनकी वेशभूषा का उनके अपने धर्म आचरण का उनके अपने खाने-पीने का उनकी अपनी संस्कृति का इज्जत मान सम्मान करना चाहिए भारत ही एक ऐसा देश है जहां पर हम बिना वीजा के एक अलग-अलग एटमॉस्फेयर में अलग-अलग कल्चर में अलग-अलग भूमि में आसानी से अपने व्यापारिक रिलेशन बना सकते हैं एंटरटेनमेंट हब बना सकते हैं और बहुत सारी चीज ऐसी हैं अलग-अलग धरातल एक साथ होने से हमें अपनी जरूरत की चीज अपने भारत देश में ही मिल जाती है इन सभी चीजों को देखते हुए मैं आप सभी भारत के वासी और नागरिकों से रिक्वेस्ट करूंगा कि कृपया आप इन नेताओं और बाहरी विदेशी पॉलिटिक्स को समझें और आपस में ना किसी भाषा के बेस पर और ना किसी पहनावे और ना किसी कल्चर के बेस पर आपस में ना लड़े आपस में प्यार करो एक दूसरे का सम्मान करो अपने घरों में विजिट करो और अपने देश का विकास करें।lllइस पिट सियापा/थर्ड घल्लूघारा का कारण कोई नहीं जानता या वे लोग जानबूझकर अंधे हैं। एक तरफ पूरे आजाद देश की सेना और दूसरी तरफ एक आदमी और उसके द्वारा तैयार किए गए कुछ हथियारबंद लोग और पूरी सेना ने बड़ी संख्या में हथियार, गोला-बारूद, एके 47 और एके 56 राइफलें, रॉकेट लॉन्चर, बड़ी संख्या में ऐसे हथियार इकट्ठा किए जो उस समय सेना के पास भी नहीं थे। क्या ये सब एक ही दिन में इकट्ठा किया गया??? क्या किसी पवित्र धार्मिक स्थल पर ऐसे खतरनाक हथियार और उपकरण की जरूरत थी?? क्या ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस सब को नज़रअंदाज़ करने के लिए अंधी थीं??? और फिर बदले में सेना ने जो किया, तो क्या ये क्रिया की प्रतिक्रिया नहीं थी???तो फिर इन सबका असली दोषी उस समय की सरकार थी या कोई और??? यह निर्णय वही लोग ले सकते हैं जो निष्पक्ष हैं और जिनका विवेक साफ़ है। दरबार साहिब की गरिमा और पवित्रता को ठेस पहुंचाने वाला असली पाखंडी वही है जो इस पवित्र स्थान की आड़ में ये सब चीजें इकट्ठा करता रहा और परिणामस्वरूप उस समय की सरकार को इसे रोकने के लिए वो कदम उठाने पड़े जबकि हमले से पहले लाउड स्पीकर पर चेतावनी भी दी गई थी। अगर दूसरे पक्ष ने इस पवित्र स्थान की गरिमा के बारे में सोचा होता तो वे लोग पहली आवाज पर बाहर आ गए होते, लेकिन अपने अहंकार के कारण उन्होंने जानबूझकर अपनी जान गंवाई और गुरुद्वारा भवन को भी नुकसान पहुंचाया। फिर ऐसी सरकारों को दोषी ठहराया जाता है और असली पाखंडियों की पूजा की जाती है।lll अपनी-अपनी राय से सोशल साइट्स भरी हुई हैं. ये कुछेक ही हैं..lll


