सालों तक जब्त वाहन रखने की जरूरत नहीं, डिजिटल साक्ष्य को बनाएं समाधान : हाईकोर्ट

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चंडीगढ़ 13/11/2025 अल्फा न्यूज़ इंडिया डेस्क—–*थानों में सालों तक जब्त वाहन रखने की जरूरत नहीं, डिजिटल साक्ष्य को बनाएं समाधान : हाईकोर्ट* ने आदेश जारी किया है। *वाहनों की फोटो व वीडियो लेकर बाद में गवाहों से करवाई जा सकती है पहचान**निचली अदालतों को आदेश, कारण बताए बिना रिहाई से न किया जाए इन्कार**पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पुलिस थानों में सालों तक जब्त वाहन रखना किसी काम का नहीं है.। समाधान उच्च गुणवत्ता वाले फोटोग्राफ और वीडियो रिकॉर्ड करने में है जिन्हें बाद में पीड़ितों या गवाहों को पहचान के लिए दिखाया जा सके। डिजिटल सबूत को तकनीक के इस्तेमाल के साथ अनिश्चितकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। हाईकोर्ट के आदेश के कारण अब केस प्रॉपर्टी के रूप में थानों में वाहन कंड़म नहीं होंगे।**अदालत ने निर्देश दिए कि यह आदेश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजा जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल उन वाहनों की रिहाई से संबंधित है जो किसी कानून या न्यायिक आदेश के तहत जब्त या कुर्क किए जाने के लिए आवश्यक नहीं हैं। पीठ ने कहा कि जिला न्यायपालिका ऐसे वाहनों की रिहाई से संबंधित याचिकाओं को ठोस कारण बताए बिना अस्वीकार न करे।**यह निर्देश उस समय आए जब अदालत ने हमले के मामले में प्रयुक्त कार की रिहाई से संबंधित निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने 60 दिनों में निर्धारित शर्तों का पालन करने पर वाहन रिहा करने का आदेश दिया है। निचली अदालत के इस तर्क पर कि सह आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि अगर सह आरोपी कभी भी गिरफ्तार न हों तो क्या वाहन को हमेशा के लिए पुलिस के पास रखा जाएगा। अदालत ने तर्क दिया कि अगर घटना किसी मेट्रो, विमान या ट्रेन में हुई होती तो क्या उन वाहनों को भी वर्षों तक जब्त रखा जाता।**अदालत ने चेताया कि थानों में वर्षों तक खड़े वाहन न केवल जंग खाकर बेकार हो जाते हैं बल्कि उनका आर्थिक और पारिस्थितिक नुकसान भी होता है। ऐसे वाहन सूर्य, धूल, बारिश और तूफानों में खराब हो जाते हैं जिससे पहचान कठिन हो जाती है।*साभार।।।।।।

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