बाहर कहीं नहीं,भीतर ही है भगवान, ध्यान और ज्ञान
चंडीगढ़:-02 जून: आरके विक्रमा शर्मा करण शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति:—*एक दिन सुबह-सुबह दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा है ।* *मैंने कहा, “जी कहिए..”* *तो उसने कहा,* *अच्छा जी, आप तो रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे?* *मैंने कहा*…

