कुछ तो है दम, कि सब पर भारी पड़े हैं हम, ना सावन हरे न भादों सूखे
चंडीगढ़: 28 नवंबर:-आरके विक्रमा शर्मा/ एनके धीमान:— कभी सोचा है कि यह कितना कड़वा सच है कि किसी झूठ को बार-बार कहने से एक दिन वह भी सच हो जाता है और उसी रूप में संसार में व्यापक होकर स्वीकार्य हो जाता है।। यहां कुछ बहुत ही सटीक उदाहरण किसी व्हाट्सएप यूजर ने अल्फा न्यूज़…

