मातृ और प्रादेशिक भाषाओं पर कुशासन है फिरंगी भाषा का
चंडीगढ़ 06-03-2025 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति — जो व्यक्ति अपने मां-बाप और गुरु सहित अपने राष्ट्र का भक्त नहीं हो सकता है वह कभी-भी विश्वास पात्र हो नहीं सकता है। जब हम अपनी मातृभूमि मातृभाषा गुरुजनों का मानवता का आदर सत्कार नहीं करेंगे। उनके प्रति सेवा भाव नहीं रखेंगे। तो हमें भौतिक सुख…

