ये किस बाज़ार में आ गए हम’:-रामकुमार तुसीर
चंडीगढ़: 11 अगस्त: आरके विक्रमा शर्मा/ अनिल शारदा प्रस्तुति:—-‘जिदगी के इस मेले के किस बाज़ार में पहुंच गए हम जहां हम दस कदम चले तो ईमानदारी, इंसानियत, परस्पर सहानुभूति जैसे खिसकने लगे हैं। ठीक वैसे ही जैसे किसी भीड़ में कुछ प्रतिकूल, कुछ अवांछित होने की सूचना या आभास से लोग जगह छोड़ने लगते हैं।…

