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चंडीगढ़ शुक्रवार 9 अक्टूबर 20 26 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा मुंबई से अरुण कौशिक—- नाना पाटेकर विविध प्रकार के अभिनव का अभिन्न कलाकार था। रोम रोम में कला बसती थी। और दिलो दिमाग़ में हमेशा जरूरतमंदों के लिए परोपकार की निस्वार्थ सेवा।। एक बेजोड़ यादगार दौर का अंत… नाना पाटेकर जी को कला चितेरों की भावपूर्ण अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि 🙏। कुछ कलाकार केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि हमारी उम्र के एक पूरे दौर और हमारी यादों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। नाना पाटेकर जी मेरे लिए ऐसे ही कलाकार थे। किशोरावस्था से युवावस्था तक उनकी फिल्में देखने का एक अलग ही सिलसिला रहा। अंकुश, प्रतिघात, परिंदा, प्रहार, अंगार, तिरंगा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी और यशवंत… एक के बाद एक ऐसी फिल्में, जिन्होंने दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। उनका अभिनय महज मनोरंजन नहीं था। उसमें आम आदमी का संघर्ष, समाज की कड़वी सच्चाइयाँ और मानवीय संवेदनाओं की गहराई थी। उनकी आँखों की तीव्रता, संवादों की धार और अभिनय की स्वाभाविकता उन्हें सबसे अलग बनाती थी। वे किरदार निभाते नहीं थे, उन्हें जीते थे। आज उनके निधन का समाचार सुनकर ऐसा लग रहा है, जैसे अपनी किशोरावस्था और युवावस्था की अनगिनत यादों से जुड़ा एक पूरा सिनेमाई अध्याय समाप्त हो गया हो। वक्त बदला, उम्र के पड़ाव बदले, सिनेमा भी बदल गया… लेकिन उनकी फिल्मों का प्रभाव और उनसे जुड़ी स्मृतियाँ आज भी उतनी ही जीवंत हैं। कुछ कलाकार फिल्में छोड़ जाते हैं, कुछ किरदार… लेकिन नाना पाटेकर जैसे कलाकार एक पूरी पीढ़ी की यादों में हमेशा जीवित रहते हैं। इस विलक्षण और सशक्त अभिनय प्रतिभा को विनम्र श्रद्धांजलि। आरके विक्रमा शर्मा अल्फा न्यूज़ इंडिया ने भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि भेंट करते हुए कहा कि नाना पाटेकर अपनी समकालीन कलाकार कम्युनिटी से बहुत बेहतरीन उम्दा और सर्वोपरि कला को समर्पित कलाकार थे। वह अपने से दो-तीन दशक छोटे फिल्मी आर्टिस्ट कम्युनिटी के लिए प्रेरणा स्रोत थे उनकी फिल्म देखते वक्त हर दर्शक उसमें डूब जाता था। और अपनी ही कहानी समझ कर हंस और रो लेता था। जबकि अन्य उनसे कनिष्ठ और वरिष्ठ अभिनेताओं की फिल्म देखकर लगता था कि मनोरंजन करने आए हैं। जब कभी भी भविष्य में संजीदगी भरे अभिनय की बात होगी तो नाना पाटेकर जी का नाम लिए बिना अधूरी रहेगी।।
ॐ शांति। 🙏


