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चंडीगढ़ शनिवार 30/05/2026 अनिल शारदा हरीश शर्मा अश्वनी शर्मा प्रस्तुति –**ऐश्वर्या राय बच्चन ने 7-8 दिन की शूटिंग के बाद अचानक मधुर भंडारकर की फ़िल्म हीरोइन छोड़ दी थी। इस निर्णय से मधुर डिप्रेशन में चले गए थे। हालाँकि करीना कपूर के साथ फ़िल्म बनाई गई। अभिषेक बच्चन ने जेपी दत्ता की पलटन को तब छोड़ा था जब फ़िल्म का क्रू लद्दाख में पहले शूटिंग शिड्युअल के लिए पहुँच चुका था। इन मामलों में निर्माताओं ने एक्टर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई या कहे कदम नहीं उठाए थे। तिस पर ये फ़िल्में फ्लोर पर थी। कितनी हानि हुई होगी। लेकिन…लेकिन! रणवीर सिंह को लेकर निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी फ्वाइस पहुंचे। और संस्था ने रणवीर पर इंडस्ट्री बैन कम बॉयकॉट लगा दिया है। मामला सिर्फ डॉन 3 से जुड़ा होता तो फरहान और रितेश यकीनन बैठकर सुलटा लेते। चूँकि कि रणवीर ने एक्सेल एंटरटेनमेंट के लिए गली बॉय और दिल धड़कने दो फ़िल्म की है। असल में रणवीर के मामले को समझने के लिए इसका बैकग्राउंड देखना पड़ेगा। अप्रैल के पहले हफ़्ते में रणवीर सिंह नागपुर आरएसएस मुख्यालय गए थे और डॉक्टर हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। संघ प्रमुख मोहन भागवत से डेढ़ घंटे लंबी बातचीत की। इससे पहले संघ के शताब्दी वर्ष के लिए वीडियो बनाकर साझा किया। चादर छोड़कर मंदिरों में माथा टेक रहे है। माथे पर त्रिपुंड लगाकर आशीर्वाद ले रहे है। प्रसिद्ध लेखिका और कॉलमनिस्ट शोभा डे को अर्जुन रामपाल द्वारा भारत माता की जय को बॉलीवुड के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने अपने लेख में लिखा कि बॉलीवुड का एक खास विचारधारा द्वारा इस तरह का प्रभाव चिंताजनक है, जहां नैरेटिव को बदला जा रहा है और जो इस विचारधारा का समर्थन करते हैं, उन्हें इनाम मिल रहे हैं।अर्थात् बॉलीवुड ल्यारी का बिखरता सिस्टम पुरज़ोर तरीके से कोशिश में है कि जो हमारे सिस्टम को छोड़ रहे है या तोड़ रहे है। उन्हें सबक सिखाना आवश्यक है। रणवीर सिंह आरएसएस हेड क्वाटर नहीं गए होते और धुरंधर में ल्यारी के अब्बू दाऊद की बुरी गत नहीं दिखाई होती तो ऐसा कुछ नहीं होता। बॉलीवुड ल्यारी रणवीर सिंह का बॉयकॉट यानी बैन कर रहे है। जब बहुसंख्यकों ने इनकी फ़िल्मों का बहिष्कार किया था तो काँप उठे थे। इसलिए रणवीर का बॉयकॉट घंटे का बॉयकॉट है। फरहान अख्तर सीएए क़ानून के मुखर विरोधी है तो बदलते रणवीर सिंह को कैसे छोड़ देंगे। जब उन्हें मालूम चला कि ये तो हमारे बीच हमज़ा है। बॉलीवुड ल्यारी के परिवर्तित होते वातावरण से चिढ़े बैठे लोग ही रणवीर को अन प्रोफेशनल घोषित कर रहे है। बॉलीवुड में सनातनी विचार धारा कैसे आ सकती है। जबकि फरहान के अब्बू ने तो सनातनी विचारधारा को मंदिर की सीढ़ियों पर बैठाए रखा और प्रसाद भी खाने नहीं दिया। विजय नास्तिक था भगवान से झगड़ने पहुँच गया लेकिन बिल्ले को सीने से चिपकाए रखता था। उस बॉलीवुड में रणवीर मंदिर जाकर त्रिपुंड लगायेगा और हम देखते रहेंगे। जय श्रीराम

