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-चंडीगढ़ नई दिल्ली शुक्रवार 01 भी 2026– अल्फा न्यूज़ इंडिया प्रस्तुति — भारत के उच्चतम न्यायालय ने 30/04/2026 को केंद्र सरकार से कहा कि नाबालिग लड़कियों के दुष्कर्म से हुई प्रेग्नेंसी के मामलों में गर्भपात की कानूनी समय-सीमा हटाने के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट में संशोधन किया जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एम्स दिल्ली की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका 15 साल की लड़की की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने के निर्देश के खिलाफ दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की याचिका सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अस्पताल नाबालिग पर अपना फैसला नहीं थोप सकता। बेंच के मुताबिक, प्रेग्नेंसी जारी रखनी है या टर्मिनेट करनी है, फैसला लड़की का है। नाबालिग रेप पीड़िता को… गर्भपात कानूनः 20 से 24 हफ्ते तक की समय-सीमा तयः 2021 के संशोधित कानून के अनुसार, सामान्य मामलों में गर्भपात की अधिकतम सीमा 20 हफ्ते है। विशेष स्थितियों जैसे दुष्कर्म पीड़िता, नाबालिग, दिव्यांग या गंभीर भ्रूण विकृति में इसे 24 हफ्ते तक अनुमति दी गई है। 24 हफ्ते के बाद गर्भपात केवल तभी संभव है, जब महिला की जान बचाने के लिए यह तत्काल अनिवार्य हो।। साभार।।।।

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