भारत मां का खांटी सादगीपूर्ण जीवनधारी राष्ट्रभक्त सांसद सन्यासी स्वामी रामेश्वरानंद जी

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चंडीगढ़ मुंबई 09.07.2025 आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा अरुण कौशिक प्रस्तुति —फाइवस्टार होटल में भी घर से लायी बाजरे की रोटी खाते थे ये सांसद, कभी नहीं लिया वेतन जानकार हैरानी होगी और यकीन भी नहीं होगा आपको, विश्वास न हो तो गूगल पर सर्च कर सकते हैं

गुरुकुल घरोंदा के आचार्य और जनसंघ के टिकट पर सांसद बनने वाले, जिन्होंने कभी सरकारी आवास नहीं लिया । वे दिल्ली के बाजार सीताराम, दिल्ली-6 के आर्य समाज मंदिर में रहते थे और संसद भवन तक पैदल जाया करते थे वहां की कार्रवाई में भाग लेने के लिए।

वे ऐसे पहले सांसद थे, जो हर सवाल पूछने से पहले संसद में एक वेद मंत्र बोला करते थे । उनके द्वारा बोले गए सभी वेद मंत्र संसद की कार्रवाई के रिकार्ड में देखे जा सकते हैं। उन्होंने एक बार संसद का घेराव भी किया था, गोहत्या पर बंदी के लिए।

एक बार इंदिरा गांधी ने किसी मीटिंग में उन स्वामी जी को पांच सितारा होटल में बुलाया। वहां जब लंच चलने लगा तो सभी लोग बुफे काउंटर की ओर चल दिये। लेकिन स्वामी जी वहां पर नही गए। उन्होंने अपनी जेब से लपेटी हुई बाजरे की सूखी दो रोटी निकाली और बुफे काउंटर से दूर जमीन पर बैठकर खाने लगे।

इंदिरा जी ने उनसे कहा कि “आप क्या करते हैं ? क्या यहां खाना नहीं है ? सभी पांच सितारा व्यवस्थाएं आप सांसदों के लिए ही तो की गई हैं।”

“मैं संन्यासी हूं सुबह भिक्षा में किसी ने यही रोटियां दी थी इसलिए साथ ले आया, मैं सरकारी धन से रोटी भला कैसे खा सकता हूं।”

इंदिरा जी का धन्यवाद देते हुए होटल में उन्होंने इंदिरा से एक गिलास पानी और आम के अचार की एक फांक ले ली थी। जिसका भुगतान भी उन्होंने इंदिरा जी के मना करने के बावजूद किया था !

जानते हैं यह महान सांसद और संन्यासी कौन थे?

ये थे सन्यासी स्वामी रामेश्वरानंद जी, परम गौ भक्त, अद्वितीय व्यक्तित्व के स्वामी जी हरियाणा के करनाल से सांसद थे।
सांसद रहते हुए भी कभी कैंटीन का खाना नहीं खाया। जेब में दो रोटी लेकर संसद जाते थे। अपना सारा वेतन रक्षा कोष में देते थे। यह कहानी है स्वामी रामेश्वरानंद की। जनसंघ से जुड़े स्वामी 1962 में करनाल लोकसभा से सांसद बने, पर सरकारी सुविधाएं नहीं लीं। आर्य समाज मंदिर के एक छोटे से कमरे में रहते थे। अपनी दो रोटी कभी खुद बना लेते थे या भिक्षा में ले लेते थे।

ऐसे अनेकों साधक हुए इस देव भूमि भारत पर जिनके विषय में हमें पढ़ाया ही नहीं गया और ना बताया गया। अपनी राज सत्ता लालच के कारण कांग्रेस ने कभी ऐसे लोगों को आगे नहीं बढ़ने दिया। यहां तक कि लालबहादुर शास्त्री जी को भी सदैव पीछे रखा।

कभी मौका लगे तो आप भी अवश्य जानिए ऐसे व्यक्तित्वों के विषय में, भारत को तपस्वियों का देश ऐसे ही नहीं कहा जाता है , भला हो भारतीय जनता पार्टी का कि अब ऐसे तमाम नेता देश सेवा के लिए आगे आए हैं ।

कांग्रेस शासन में ऐसे महान व्यक्तियों का कहीं भी और कभी भी जिक्र नहीं किया जाता था और ना ही उन्हें आगे बढ़ने दिया जाता था…..।।जय भारत वंदे मातरम

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