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चंडीगढ़ बुधवार 21/10/26 रक्षत शर्मा+ अनिल शारदा/आरके विक्रमा शर्मा —-*दीपावली के पावन पर्व को लेकर गौरी शंकर सेवादल गौशाला, सेक्टर-45 में गौमाता के गोबर से शुद्ध एवं पारंपरिक हर्बल दीपक तैयार किए जा रहे हैं। इन दीपकों में पीली सरसों, जटामांसी, गुग्गुल, लोबान तथा हवन सामग्री सहित विभिन्न पारंपरिक प्राकृतिक सामग्रियों का मिश्रण किया जा रहा है। सेवादल की ओर से हर वर्ष इन दीपकों को श्रद्धा और सेवा भाव के साथ तैयार कर धनतेरस के शुभ अवसर पर लोगों में निःशुल्क वितरित किया जाता है।गौसेवा और धार्मिक आस्था का अनूठा संगमदीपावली पर मां लक्ष्मी के स्वागत और पूजन में दीपक का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में गौमाता को पूजनीय स्थान प्राप्त है। इसी आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गौशाला में गौमाता के गोबर से दीपक तैयार किए जा रहे हैं, ताकि लोग दीपावली पर पारंपरिक दीपकों के माध्यम से अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने के साथ-साथ गौसेवा के महत्व को भी समझ सकें।इन दीपकों को बनाने का उद्देश्य केवल दीपावली की परंपरा को निभाना ही नहीं, बल्कि समाज को गौमाता के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के प्रति जागरूक करना भी है।हर वर्ष निःशुल्क वितरण, जनसेवा का संकल्पगौरी शंकर सेवादल की ओर से हर वर्ष धनतेरस पर श्रद्धालुओं को ये दीपक निःशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं। सेवादल का संदेश है कि दीपावली का पर्व केवल घरों को रोशन करने का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, सद्भाव, आस्था और जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटने का भी पर्व है।सेवादल की ओर से शहरवासियों से अपील की गई है कि वे धनतेरस के शुभ अवसर पर गौरी शंकर सेवादल गौशाला, सेक्टर-45 में पहुंचकर गौमाता के गोबर से तैयार इन पारंपरिक दीपकों को प्राप्त करें और गौमाता का आशीर्वाद लें।

