विशेष कक्षाओं से भी जरूरी है शारीरिक शिक्षा

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चंडीगढ़ सोमवार 8जून 2026 आरके विक्रमा शर्मा हरीश शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा—– एक अच्छे स्वस्थ शरीर में ही अच्छा तंदुरुस्त दिल और दिमाग निवास करते हैं। प्राचीन भारत में लोग शारीरिक स्वस्थ्य निरोगिता के बलबूते ही स्वस्थ दीर्घायु जीवन जीते थे। हालांकि बड़ी संख्या में अशिक्षित होते थे पर स्वयं को स्वस्थ रखकर स्वस्थ समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत करते थे। प्राचीन भारत और आधुनिक भारत में यही सबसे बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है जिसके फल स्वरुप आधुनिक भारत के लोग नाना प्रकार के असाध्याय रोगों से ग्रसित जीवन जी रहे हैं। गुरुकुल की भांति आधुनिक स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षाओं की जगह स्पेशल क्लास ने ले ली है। इसी लापरवाही या अशुद्धि कुड्रस्ट करते हुए तमिलनाडु की सरकार ने अपने राज्य में सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में अब स्पेशल क्लास की जगह शारीरिक शिक्षा को महत्व देते हुए अनिवार्य रूप से लागू करने की सरहनी और महत्वपूर्ण घोषणा की है। कहते हैं कि जिस प्रकार की आदतें डाली जाती हैं वही आगे चलकर जीवनशैली बन जाती है। इसीलिए 12वीं कक्षा तक सभी विद्यार्थियों को स्वास्थ्य शिक्षा ग्रहण करना अनिवार्य किया गया है। अल्फा न्यूज़ इंडिया और मीडिया जंक्शन सहित अनेकों धार्मिक संस्थाओं हिम एकता वेलफेयर महासंघ पंजीकृत ट्राई सिटी और सिद्ध सर्व सांझा लंगर सेवा मिशनदाल त्रि सिटी और हिंदू संगम परिषद पंजीकृत भारत ने परफेक्ट मीडिया पर के साथ मिलकर पुरजोर मांग करते हुए कहा है कि सरकार अपने-अपने राज्य में सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा के महत्व और अनिवार्यता को मध्य नजर रखते हुए शक्ति और सख्ती से लागू करें।।

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