भ्रष्टाचार रहा तो न देश न समृद्धि न संस्कृति बचेगी

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 भ्रष्टाचार रहा तो न देश न समृद्धि न संस्कृति बचेगी तो बचेगा क्या !! नेतृत्व करने वाले जवाबदेह और जिम्मेवारी से मुंह मोड़ने वाले देश का ही नहीं अपितु देशवासियों का भी बेड़ागर्क करने  कस्र नहीं छोड़ेंगे! क्या समस्या के लिए वास्तविक तौर पर ये जन प्रतिनिधि ये नेतृत्व सम्भालने वाले देश भक्तों और शहीदों का उपहास उड़ाने वाले कम हैं ज्यादातर जिम्मेवार हम देशवासी ही हैं ! जिन्होंने आज  कसूरवारों को सख्त सजा और सजाये मौत नहीं दी है ! अगर न्याय और देश हित  में किसी पहले ही कसूरवार को जिम्मेवारी से विहीन करते हुए सजाये मौत दी होती तो ये विषबेल ही  नहीं होती, और देश समृद्ध आत्मसम्मानी होता ! इसी पर राकेश शर्मा बाबैन कुरुक्षेत्र की कलम से प्रस्तुत ;



देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाना कौन नही चाहता देश का हर वह नागरिक जिसको अपने देश से प्यार है ओर देश के लिए कुछ कर दिखाने की चाह रखता है भला ऐसा कौन नही चाहता, देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाना तो सभी चाहते है लेकिन क्यों रूक जाते है हमारे बढ़ते कदम आखिर क्या हो जाता हमारे देश प्रेमीयों को क्या जो बाते हम सुनते है या कहते वो सिर्फ ओर सिर्फ बोलने में ही अच्छी लगती है। हम बात कर देश के  प्रगति में सब से बढ़ा रोढ़ा भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार हर नागरिक की पीढ़ा जो अपने देश से प्यार करता है ओर अपने देश के लिए कुछ भी करने का मादा रखता है। भ्रष्टाचार हमारे भारत के हर कोने में पायें जाना वाला ऐसा वायरस है जिससे कोई भी नही बच होगा । 
भ्रष्टचार को खत्म करने की बात तो सभी करते है लेकिन यह कम होने की बजाय बढ़ा ही जा रहा है। 
जब देश का हर नागरिक अपने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अच्छा उम्मीदवार चुन कर पंच,सरंपच,विधायक ओर  देेश की सबसे बढ़ी पंयायत का सदस्य सांसद चुन लेता है तो उसे आस होती है शायद हमारी वोट का सही इस्तेमाल हो गया है ओर देश को तरक्की की राह पर ले जाने के लिए हमाने एक ऐसा सगंठन चुन लिया जो गांव से कस्बे ओर कस्बे से लेकर शहर तक हर समस्या का समाधान करेगे। परन्तु उसका भ्रम टुटने देश नही लगती जब कोई ना भ्रष्टचार की दल दल में फस जाता है ओर हमारे सपने दरे के दरे रह जाते है।  
जरा सोचिए——-
हमारे पास अच्छी सडक़े होती तो हादसों मेें अपनों को नही खोते।
हमारे पास चौबीस घण्टे बिजली होती तो आधी आबादी अन्धेरे में ना डुबी होती।
हमारा किसान यदि इतना खुशहाल होता तो किसान आत्महत्या ना करता।
यदि हमारे देश में प्रत्येक बच्चा स्कूल जाता तो गलीयों में घूम घूम कर कुड़ा ना उठाता।
यदि चिक्तिसा इतनी अच्छी होती तो दिन प्रतिदिन ईलाज के लिए मरने वालों की तादात इतनी ना होती।
यदि देश में लड़कियों का सम्मान होता तो कोई नवजात कुड़े के ढ़ेर में ना मिलता।
यदि खेल नीतियां इतनी अच्छी होती तो 1 अरब 21 करोड़ की अबादी वाले देश के पास कम से कम 21 गोल्ड मैडल तो होते ही। 
यदि योग्यता के आधार पर युवाओं को रोजगार मिलता तो देश का युवा आरक्षण की आग में ना जलता।
्रओर कितना सहना पड़ेगा ओर कितनी बार कहना पढ़ेगा कि देश आगे बढ़ रहा है।
भ्रष्टाचार एक नजर में——जो हमें सोचने पर मजबूर करता है
हमारे देश में सरकारी नौकरियां पाना एक  ऐसी जीत के बराबर है जो हम अपने लिए सोचते है वो हम कर सकते है सरकारी नौकरियां को 100प्रतिशत सुरक्षित माना जाता है क्योकि यदि आप एक बार घुस गये तो आप को कोई नही निकाल सकता ओर अधिकतर होता भी ऐसा ही है ओर अलबता आप पकड़े भी गये तो क्या होगा कुछ समय के लिए संस्पेड़ कर दिये जाएगे। आखिर ऐसा क्यों क्योंकि भ्रष्ट व्यक्ति अपने मुनाफे के लिए करोड़ो लोगो का नुकशान करता रहता है ओर गलत तरीकों से कुछ भी पाने की सोच उसको काफी आगे ले जाती है केवल ओर केवल उसको देश को नहीं। 
भारत देश में हम अपने खादी पहनने वालों की देश का रक्षक बना बैठे ओर सोच भी बैठे की जो भी करगें देश से प्रदेश प्रदेश से गांव तक सब ठीक कर देगे लेकिन सच्चाई इसकेे उल्ट बन गयी है आज जो भी देश को आगे बढ़ाने की बडी बडी बातें करते है वो ही लोग सब से भ्रष्ट बन बैठे है या फिर भ्रष्टचार लोगो के ठेकेदार। 
ठेकेदार इसलिए कहा गया है क्योंकि हमारे देश की भलाई सोचने वाले कुछ नेता भी देश को बेचने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ते चाहे वह खराब सडक़े,दवाईयां,खाने पीने की वस्तुएं आदि से लोगों की जिन्दगी से खिलवाड़ ही क्यों ना कर रहे है। 
भारत देश में अपराधियों के बीच डर कम होने के कारण भी यह आज भ्रष्टचार चरम चीमा पर पहुचं गया है हर रोज नये नये अपराध,लूट पाट,हत्या,दगें,घोटला,ना जाने कितने प्रकार का भ्रष्ठचार जो हम सोच कर भी सोच नही सकते। देश को खोखला करने वाले लोग भी भली भातिं अब ये जान चुका है कि यदि अपराध करते हुए पकड़ा भी गया तो क्या होगा अपराधी को अपराधी साबित करने में सालों बीत जाएगे मिलगा तो क्या सिर्फ तारीख: तारीख पे तारीख एक फिल्मी डायलाग की भाति दिन बीतते जायगे ओर अपराधी बचता रहेगा आखिर इतना समय क्यों ?
प्रिय पाठकों आज भ्रष्टाचार हमारे देश को अंदर ही अंदर खाये जा रहा है हम देख भी अंन्जान बन जाते है , भ्रष्टचार करोड़ो बच्चों की शिक्षा का अधिकार छिन चुका है,ना जाने कितने युवाओं को बेरोजगार कर चुका है ओर अब बस यह हिन्द बोलने से काम नही चलेगे हमें भी आवाज उठानी चाहिए अपने लिए ही ना सही अपने आने वाले कल के लिए——-तथास्तु  !!! जयहिंद —
                                                                     

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