नेल्लू फूल खिलता है चौदह साल के बाद

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नेल्लू फूल खिलता है चौदह साल के बाद,रुद्राक्ष एकमुखी खिलता बारह वर्षों बाद 

चंडीगढ़ ; 5 जनवरी ; आरके शर्मा विक्रमा ;—-प्रकृति भगवान की देन है तभी तो इसका पार बे अथाह है ! ये वो भेद शून्य है जिसके लिए सोच का दायरा भी असीमित होकर भी जीरो है ! भगवान को पाया जा सकता है और पाया भी है पाने वालों ने ! पर कुदरत का खजाना कभी भी खाली न होने वाला भंडार है ! कहते हैं कि  भगवान शिव का ग्यारह रुद्राक्ष हैं और बारह ज्योतिर्लिंग भारत वर्ष की पवित्र और सौभाग्यशाली भूमि पर स्थित हैं ! और ये प्रकृति के अंक  में वृक्ष बनकर उपस्थित है ! हिमालय की पर्वत श्रेणियों की अनेकों चोटियों पर ये रुद्राक्ष वृक्ष अपनी प्राचीनता और पराकाष्ठा का बिम्ब स्वयं है ! एक मुखी से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष पाए जाते हैं ! सब भगवान शंकर के स्वरूपों के अनुरूप परिभाषित हैं !और सहस्त्रों गुणों से लबरेज हैं ! हर एक मुखी रुद्राक्ष अनेकों जटिल बिमारियों से निजात दिलाने में खुद बा खुद में समर्थ है ! आयुष ज्ञान इनके ज्ञान बिना अधूरा है ! इन सबसे से सर्वोत्तम और सर्वोच्च स्थान का सुपात्र और भगवान शिव के कंठ का श्रृंगार एक मुखी रुद्राक्ष कहा जाता है ! इसको धारण करने वाला प्राणी कभी भी अल्पायु का शिकार नहीं बनता है ! इसमें खुद भगवान कालेश्वर जी का वास  रहता है ! ये सर्वोत्तम भक्ति का पात्र ब्रह्मास्त्र तुल्य शक्ति का द्दोतक है ! ऐसे ही अनेकों पुष्प हैं जोकि एक वर्ष में सिर्फ एक मर्तबा ही अंकुरित होकर फूल और फिर फल और बीज की  जन्मस्थली बनती है ! एक मुखी रुद्राक्ष भी बारह वर्षों बाद रुद्राक्ष वृक्ष पर दर्शनीय होता है यानि पैदा होता है ! 
दुनिया में कुदरत के नजरानों और खजानों की बात करें तो ऐसे ही एक और पुष्प के बारे में पढ़ने का अवसर मिला ! उसी जानकारी को सुधि पाठकों से सांझे करते हुए अच्छा भान हो रहा है ! श्रीलंका में भी कुदरत के खजानों की खानें हैं ! जी हाँ वही श्रीलंका जिसके महाराज लंकेश रावण ब्राह्मण थे ! जो अकूत शक्ति के पुरोधा भी थे और आज तक की सृष्टि में सबसे अधिक ज्ञानवन चार वेदों और छह शास्त्रों के ज्ञाता थे ! उनके पिता श्री भगवान शंकर के पुरोहित थे ! एक भाई विभीषण रामभक्त थे तो दूसरे पराक्रमी बलशाली कुम्भकर्ण थे ! पुत्र इंद्रजीत मेघनाथ के पुत्र का नाम  अक्षय कुमार था ! श्रीलंका में भगवान राम चंद्र और रावण का महायुद्ध यानि रामायण कालीन विश्व युद्ध  लड़ा गया था जिसको मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जी ने जीता था !  
 बात कर रहे हैं कि श्री लंका में वो पुष्प जो चौदह वर्षों बाद देखने को मिलता है उसका नाम  नेल्लू पुष्प कहलाता है ! ये उस  क्षेत्र में अधिकतर पाया जाता है जिस क्षेत्र में नुवाराइलिया के पर्वतों  से कल कल बहने वाली नदी  केलानी पर्वतों की सुरमई शांत वादियों में कोलाहल करते बहती है ! ये दीगर बात तो ये है कि इसी नदी को श्रीलंका की राजधानी  कोलंबो की जीवन  रेखा [लाइफलाइन] कहा जाता है !  नुवाराइलिया समुद्र की  सतह से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा है और ये एक पहाड़ी सुंदर सिटी है !  नेल्लु पुष्प चौदह वर्षों में एक बार खिलता है के दर्शन भी बमुश्किल से होते हैं ! इसी अतिसुंदर पुष्प नेल्लू के नाम पर ही उक्त क्षेत्र का नामकरण नुवाराइलिया पड़ा ! एनआरआईज इस इलाके को देखने कई कारणों से आते हैं पर बायो विज्ञानी और प्रकृति के चितेरे इसको देखने की ललक लिए ही आते हैं ! 

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