धर्मपरक बनने के लिए क्रमव्ययी बनना अनिवार्य ; पवन मदान

चंडीगढ़ ; 28 फरवरी ; आरके शर्मा विक्रमा ;– धर्म तभी स्थिर होता है जब कर्म में सादगी निरंतरता और ईमानदारी का समावेश होता है ! कर्म को धर्म बनाने के लिए कर्म पूंजी का खर्च सर्वमान्य और सर्वोन्मुखी होना चाहिए ये विचार भारतीय स्टेट बैंक [एसबीआई] के सेवानिवृत हुए पवन मदान ने अपनी निजी वार्तालाप…

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