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चंडीगढ़ बुधवार 29 जुलाई विश्व 26 आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा—- आज बुधवार गुरु पूर्णिमा दिवस है। आज की पवित्र तिथि को महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था तभी तो इसको गुरुपर्णिमा या व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया वर्गीकरण किया। भारतीय ज्ञान परम्परा को सुव्यवस्थित सर्वोपरि सर्वश्रेष्ठ आधार दिया। फल स्वरुप महर्षि वेदव्यास जी को आदि गुरु का सम्मान प्राप्त हुआ।। माता सत्यवती और पिता महर्षि पराशर की संतान वेद व्यास थे। कहा जाता है महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के अंश अवतार कहे जाते हैं। महर्षि वेदव्यास जी ने कठिन तप किया भगवान विष्णु जी को प्रसन्न किया और दिव्य ज्ञान की पूंजी वरदान स्वरूप प्राप्त की। आगे चलकर वेदव्यास जी ने वेदों को चार भागों में सुव्यवस्था दे। वेदों का सरलीकरण संकलन व वर्गीकरण वेदव्यास की देन है। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत का महाकाव्य बोलकर भगवान गणेश से लिखवाया था जो एक ही बैठक में संपन्न हुआ था। महर्षि वेदव्यास जी दूरदर्शी ही नहीं बल्कि त्रिकालदर्शी भी थे।। गुरु पूर्णिमा सनातन हिंदू धर्म संस्कृति की परंपराओं का प्रवाह है। गुरु बिन ज्ञान नहीं और ज्ञान बिना ध्यान नहीं। गुरु और ज्ञान सहित ध्यान का महा वर्णन वेदों की संरचना स्वरुप है। गुरु के प्रति अपनी प्रतिबद्धता श्रद्धा आस्था विश्वास और समर्पण जीवन पर्यंत भी रहना चाहिए।।


