मूत्र संबंधी रोग एवं उनका प्राकृतिक, पारम्परिक एवं घरेलू उपचार– वैद्य कौशल

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*चंडीगढ़ शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा—- अगर आपको सामान्य से अधिक बार मूत्र करने जाना पड़ता है तो, यह मूत्राशय यानी ब्लैडर में, किसी समस्या के कारण हो सकता है। ऐसे में मूत्राशय के कमजोर होने की संभावना होती है और यह दैनिक कार्यों और रात की नींद में, बाधा डाल सकता है। *प्रोस्टेट में अवरोध का कारण*प्रोस्टेट ग्रंथि में ज्यादा वृद्धि हो जाने के कारण मूत्र उत्सर्जन में परेशानी आने लगती है।इसके आकार में वृद्धि के कारण ही मूत्र नलिका का मार्ग अवरुद्ध हो जा जाता है।इसकी वजह से पेशाब रुक जाता है।अभी तक प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है।बढ़ती उम्र के साथ ही हमारे शरीर में होने वाला हार्मोनल परिवर्तन इसका एक संभावित कारण हो सकता है।*प्रोस्टेट ग्रंथि में गड़बड़ी के लक्षण -*✓ पेशाब करने की आवृति में वृद्धि।✓ बहुत जोर से पेशाब का अहसास होना लेकिन पेशाब करने जानें पर बूंद-बूंद करके निकलना या पेशाब रुक-रुक के आना।✓ पेशाब धार के चालू होने में अनावश्यक विलम्ब होना।✓ मूत्र विसर्जन के पश्चात् मूत्राशय में कुछ मूत्र शेष रह जाना. इससे रोगाणुओं की उत्पति होती है।✓ पेशाब करने में पेशानी का अनुभव करना।✓ अंडकोष में लगातार दर्द का अनुभव करते रहना।मूत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाना।✓ रात्रि में बार-बार पेशाब की तलब लगना।पेशाब करते समय जलन का अनुभव करना।*मूत्र का बार-बार आना स्वास्थ्य के अच्छा नही है.* ➡️ अंगूर का सेवन करने से, मूत्र की चेष्टा पर नियंत्रण होता है। ➡️ अंगूर का रस सेवन करने से गुर्दों की कार्यझमता बढ़ती है।➡️ आंवले का रस तीन चम्मच एक कप पानी में मिलाकर, सुबह-शाम चार दिन तक सेवन करें‌।➡️ जामुन की गुठली को पीसकर एक चम्मच फंकी पानी से नित्य दो बार लेनें से बिस्तर पर मूत्र जाने वाले बच्चों का ये रोग सही हो जाता है।➡️ वृद्धावस्था में होने वाले अधिक मूत्र आने वाले रोग में जामुन की गुठली व काले तिल दोनों को समान मात्रा में लेकर पीस लें। दो चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ फंकी लें। ➡️ एक केला सेवन करने के बाद आधा कप आंवले के रस में स्वादानुसार चीनी डालकर सेवन करें। केवल एक केले का सेवन करना भी लाभदायक है।➡️ पपीते का सेवन करने से मूत्र अधिक मात्रा में आता है। मूत्र अधिक लाने के लिए पपीते का सेवन करें।➡️ पालक की सब्जी का सेवन करने से रात को बार-बार मूत्र जाने की समस्या का निदान होता है।➡️ 60 ग्राम प्याज के टुकडे़ करके एक किलो पानी में उबालें।इसे छानकर स्वादानुसार शहद मिलाकर, तीन बार सेवन करें, मूत्र के बंद होने या बार-बार आने में, लाभ देता है। ➡️ मसूर की दाल सेवन करने से बहुमूत्र में लाभ होता है। साभार।।।

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