भाई दूज,यम द्वितीया का विशेष महत्व और गरिमा

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चंडीगढ़ 23 अक्टूबर 2025 आरके शर्मा अनिल शारदा—-भाई दूज का पर्व…*भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भाई-बहन के रिश्ते को सुदृढ़ और पवित्र बनाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।यह त्यौहार दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है।भाई दूज का महत्त्व और उसके पीछे की कथा दोनों ही भारतीय समाज में इस त्यौहार को एक विशेष स्थान देते हैं।*भाई दूज का महत्व…*भाई दूज पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, खुशहाली, और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक करती हैं, और आरती उतारती हैं।भाई दूज का महत्त्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक भी है, क्योंकि यह त्यौहार भाई-बहन के बीच स्नेह, सम्मान, और एकजुटता को बढ़ावा देता है।*भाई दूज की कथा…*भाई दूज से संबंधित प्रमुख कथा के अनुसार, यमराज (मृत्यु के देवता) अपनी बहन यमुनाजी से मिलने के लिए उनके घर आए थे।बहन ने यमराज का स्वागत तिलक, मिठाई, और भोजन के साथ किया।इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुनाजी को वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा।तभी से भाई दूज पर भाई-बहन का ये अनोखा मिलन पर्व मनाया जाता है।*भाई दूज मनाने की विधि…**1. स्नान और पूजा की तैयारी:*सुबह स्नान करने के बाद, बहनें पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा में तिलक लगाने के लिए चावल, रोली, और मिठाई रखी जाती है।*2. तिलक और आरती:*बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और उसकी आरती उतारती हैं। इसके बाद भाई-बहन दोनों एक-दूसरे को उपहार देते हैं।*3. भोजन और मीठा:*भाई दूज के दिन भाई को अपनी बहन के घर भोजन का विशेष महत्व है। बहनें अपने भाई के लिए विशेष भोजन तैयार करती हैं, और मिठाई खिलाती हैं।*भाई दूज का सांस्कृतिक महत्व…*भाई दूज का त्यौहार हमारे समाज में परिवार के मूल्यों और संस्कारों को प्रोत्साहित करता है। यह त्यौहार भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास और परस्पर सम्मान को दर्शाता है और उनके बीच की गहरी भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है।*संक्षेप में*भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते को संजीवनी देने वाला त्यौहार है। यह पर्व एक अवसर है कि भाई-बहन अपने बचपन की यादें ताज़ा करें, एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करें, और अपने रिश्ते को और भी सशक्त बनाएं।ll

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