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चंडीगढ़ सोमवार 4 मई 2026 रक्षत शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति — वैवाहिक मामलों मे तलाक को लेकर बरती जा रही उदासीनता और लापरवाही पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है और निर्देश दिए हैं कि वैवाहिक मामलों को 1 साल के भीतर निपटाया जाए। हाई कोर्ट ने कहा है कि तलाक़ के मामले में देरी करने से व्यक्ति की गरिमा को अनदेखी करना ही है। इसलिए तलाक के मामलों को जल्दी निपटने के निर्देश दिए हैं। फैमिली कोर्ट को लंबित तलाक याचिका 1 साल के भीतर निपटने के निर्देश दिए गए वैवाहिक विवादों को अनिश्चितकालीन तक नहीं ढील दी जा सकती है। जस्टिस बीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि वैवाहिक मामलों में अगर देरी करेंगे तो पारिवारिक न्यायलय स्थापित करने का औचित्य आधारहीन हो जाएगा। तलाक के मामले में देरी न हो यह सुनिश्चित करने हेतु संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हस्तक्षेप उचित है। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि वैवाहिक मसलों को लंबा ना खींचा जाए। पारिवारिक न्यायालय एक्ट-1984 का मंतव्य पारिवारिक विवादों में स्पेशल कोर्ट एस्टेब्लिश करके मैरिज केसेज के तलाक मामलों में निपटारा किया जाए। पीड़ित प्रभावित परिवारों में न्याय जल्दी मिलने को नई किरण जगी है।


