प्रकृति और पर्यावरण का ऋणी है भौतिक जीवन– पंडित रामकृष्ण शर्मा
चंडीगढ़ 5 जून 25 आरके विक्रमा शर्मा हरीश शर्मा अनिल शारदा— प्रकृति का संतुलन इंसान ने अपनी व्यर्थ की जरूरतों को पूरा करते-करते बिगाड़ दिया है। आज जरूर यहां तक आन पड़ी है कि पर्यावरण बचाओ, पर्यावरण है तो जीवन है, जल है तो जीवन है, पेड़ है तो जीवन है यह सब जरूरत इसलिए…

