क्या शत्रु को रोयें,मित्र भी अब ठिकाने का नहीं मिलता
चंडीगढ़ : 2 अक्तूबर : आरके शर्मा विक्रमा प्रस्तुति :—- एकबेटे के अनेक मित्र थे, जिसका उसे बहुत घमंड था। उसके पिता का एक ही मित्र था, लेकिन था सच्चा । एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तेरे बहुत सारे दोस्त है, उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते…

