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चंडीगढ़ गुड फ्राइडे 3 अप्रैल 2026 अनिल शारदा पंकज राजपूत —–,,,,और बड़े ही बेआबरु होकर,,,, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उप नेता पद से दरकिनारे कर दिया है। अशोक मित्तल के कंधों पर उपनेता की जिम्मेवारी लाल दी गई है। राघव चड्ढा जैसे आम आदमी पार्टी के कद्दावर और लोकप्रिय नेता के पंख कुतर डालने के पीछे केजरीवाल की अंदरुनी मंशा क्या है यह समय के साथ ही बादमें साफ होगा। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि केजरीवाल का राज दुलारा राघव चड्ढा इस कदर क्यों गया दुत्कारा फटकारा।। यह सवाल सियासी गलियारों में हलचल के साथ-साथ चर्चा का भी लंबे दौड़ तक विषय बना रहेगा। कान्हा खुशी पर करें विश्वास तो राघव चड्ढा केजरीवाल के येस मैन साबित नहीं हुए। पर पार्टी के दूसरी पार्टीजनों मुताबिक राघव चड्ढा अपने दायरे में ही रहे और आप पार्टी के नेताओं के तथाकथित घपला घोटालों में लिप्त होने से दूरी बनाए रहे। यही उनकी साख पार्टी को नागवार गुजरी। राघव चड्ढा ने आमआदमी पार्टी के नेताओं की करगुजारियों पर भी ध्यान नहीं दिया और मस्त हाथी की तरह अपनी समाजके प्रतिबंटी नैतिक जिम्मेवारी को हाइलाइट करते रहे उनका मानना है कि वह जनता द्वारा जनता के लिए चुने गए हैं ना कि किसी पार्टी विशेष ने उनको जितवाया है। एक तरह से बेहबरूहोकर राघव चड्ढा भी चुप रहने वाले नहीं है। केजरीवाल की यह कार्यवाही उनको अंदर तक हिला चुकी है। पर वक्त की पुकार मुताबिक राघव चड्ढा ने ज्यादा मुंह खोलने से परहेज रखा है। अगर गहराई तक देखा समझा जाए और सियासत की नब्ज़ को टटोला जाए तो हर पार्टी राजनीतिक बिसात पर इस मोहरे के लिए लालायित हो गई है। पर अभी तक सभी ने अंदर खाते भले ही कोशिशें शुरू और तेज करती हैं पर भनक नहीं पड़ने दें रहे हैं। यह भी कड़वा सच है कि राघव चड्ढा चुनाव में हार जीत का नक्शा ही बदल देने में काबिल है। और इतनी जल्दी आम आदमी पार्टी का आका केजरीवाल राघव चड्ढा को खेमे से बाहर नहीं जान देगा। लोकाचार की चुहलबाजी देखी जाए तो टिकट बांटने में राघव चढ़डा पर भी कुछ करोड रुपए लेने और पार्टी कार्यकर्ता समूह द्वारा बुरी तरह मौके पर रात में ही घेरने वाली किरकिरा का कथित शिकार हो चुका है। अब यह कितना सत्य परक तथ्य है यह तो आम आदमी पार्टी ही नहीं और पार्टीज भी बखूबी वाकिफ हैं। आम आदमी पार्टी से किनारा कर चुके सियासी गलियारों के भेदिये बोल रहे हैं कि राघव चढ़ा बहुत पहले ही आम आदमी पार्टी की गतिविधियों से खफा से दिखाई देते हैं। और पार्टी के हथकंडों में अपनी समु्लियत नहीं रखते थे। राघव चड्ढा का अगला कम क्या और किसी और होगा यह तो वह भी नहीं जानते हैं। लेकिन जो यह सब जानते हैं वह अपने तरीके से अपनी कोशिशों में जुटे हुए हैं भला वह सियासत के शौकीन शिकारी कब ऐसे मानते हैं। राघव चड्ढा एक अनार सौ बीमार की तरह सब की पहली पसंद बने हुए हैं। फिर भले ही वह शिरोमणि अकाली दल बादल हो या बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस आई माकपा भाजपा भाकपा,,,,, एंट्री गेट खोल दिए गए हैं।। राघव चड्ढा की ईमानदारी साफगोई आमआदमी पार्टी को उदास और पसंद नहीं आई पार्टी आका ने पत्र लिखकर राज्यसभा सचिव को अवगत करवाया है कि राघव चड्ढा को बोलने का समय तक ना दिया जाए। राघव चड्ढा जनहित में आवाज उठाने वाले केरूप में अच्छी पहचान और लोकप्रियता बना रहैं हैं। इन बातोंसे भी दूरी बढ़ती है। नए उप नेता अशोक मित्तल ने स्पष्ट किया श्री राघव चड्ढा को राज्यसभा मे बोलने का भरपूर समय दिया जाएगा। तो क्या अशोक मित्तल राज्यसभा में लिखकर दिए गए आका के विनय पत्र को क्रास कर कोई नया बखेड़ा खड़ा तो नहीं कर देंगे।



