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मुंबई: अल्फा न्यूज़ इंडिया प्रस्तुति—-: देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पॉलिसी रखने वाले करोड़ों पॉलिसीधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार यदि पॉलिसीधारक का नाम एलआईसी पॉलिसी रिकॉर्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते में एक समान और एक ही वर्तनी में दर्ज है, तो पॉलिसी की मैच्योरिटी के समय भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जा सकता है और कई मामलों में मूल पॉलिसी दस्तावेज़ जमा कराने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एलआईसी अब भुगतान प्रक्रिया में पहचान सत्यापन के लिए पॉलिसीधारक के पैन, आधार और बैंक खाते के विवरण का मिलान करती है। यदि इन सभी दस्तावेज़ों में नाम एक ही रूप और क्रम में दर्ज पाया जाता है, तो पॉलिसी की मैच्योरिटी पर भुगतान प्रक्रिया काफी सरल और तेज़ हो जाती है। ऐसी स्थिति में एलआईसी निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद मैच्योरिटी राशि सीधे पॉलिसीधारक के बैंक खाते में जमा कर देती है।
लेकिन यदि एलआईसी पॉलिसी दस्तावेज़ों और अन्य पहचान पत्रों में नाम की वर्तनी या स्वरूप अलग-अलग पाया जाता है, तो भुगतान प्रक्रिया में अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे मामलों में पॉलिसीधारक को मूल पॉलिसी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने या अन्य कागज़ी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं, जिससे भुगतान में अनावश्यक देरी हो सकती है।
बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि एलआईसी पॉलिसीधारकों को समय रहते अपने पॉलिसी रिकॉर्ड में दर्ज नाम का पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते में दर्ज नाम से मिलान अवश्य कर लेना चाहिए। यदि कहीं भी नाम अलग-अलग रूप में दर्ज है तो तत्काल आवश्यक सुधार करवाना बेहतर रहेगा। इससे न केवल पॉलिसी की मैच्योरिटी के समय भुगतान प्रक्रिया सरल हो जाएगी, बल्कि किसी आकस्मिक स्थिति में पॉलिसीधारक के निधन के बाद नॉमिनी को क्लेम प्राप्त करने में भी देरी और परेशानियों से बचाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलआईसी जैसी बड़ी संस्था के करोड़ों पॉलिसीधारकों के लिए नाम की यह एकरूपता भविष्य में भुगतान और दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए पॉलिसीधारकों को अपने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में नाम की समानता सुनिश्चित करने की सलाह दी जा रही है।

