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चंडीगढ 22 दिसंबर 2025 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा अश्वनी शर्मा पंकज राजपूत —- कड़ाके की सर्दी का दिसंबर यानी पौष मास अपने धर्म सखी पंथ के लिए चार सब जाटों ने और माता गुजरी ने अपने प्राणों की हंसते-हंसते इस्लामी मुसलमान के जुल्म ओ सितम निर्दयता सहन करते हुए कुर्बानी दी थी।। पर किसी ने भी अपनी सिखी नहीं छोड़ी थी। यह बलिदान की दास्तान दुनिया में बिरली ही मिलती है। ऐसे ही इन जिहादी मुसलमानों की कुर्ता सहन करते हुए सनातन धर्म के लिए वीर हकीकत राय बालक ने हंसते-हंसते अपनी कुर्बानी दी थी। यह कुर्बानियां इतिहास में प्रेरणा पुंज बनी है। सिख पंथ के प्रवर्तक ने सिखी पंथ के लिए अपने पिता बलिदानी गुरु तेग बहादुर जी और अपने चार साहबजादे अजीत सिंह जुझार सिंह और फतेह सिंह और ज़ोरावर सिंह और अपनी माता गुजरी जी के सथ-साथ अपना भी बलिदान दिया था। पर सिख पंथ पर अडिग रहे थे। इन बलिदानों को कृतज्ञतापूर्वक राष्ट्र और मानवता सदैव स्मरण करते हुए नमन करता है।। अल्फा न्यूज़ इंडिया महान बलिदानों को नतमस्तक होकर सिमरन और स्मरण करते हुए गुरु गोविन्द सिंह जी सिंह जी के उपदेशों पर चलने की शपथ लेता है।।।

