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चंडीगढ़ बुधवार पूर्णिमा 29.07.2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति—— हीरो वो होता है जिसमें एक आदर्श मिसाल…… i

ये है पंजाब पुलिस के ट्रैफिक हैडकांस्टेबल …..!!!!!!!
आज 07 जुलाई का दिन बडा खास है । क्योंकि जून जुलाई के महीने , भारत मे कारगिल की यादों को ताजा कर जाते है ।
कई किस्म के किस्से कहानियां हवा मे तैरने लगते है । कुछ किस्से हम बार सुनते है , कुछ अनसुने रह जाते है ।
बात उस वक्त की है , जब ४-५ जुलाई को 18 ग्रिनेडियर ने टाईगर हिल फतेह कर ली थी । टाईगर हिल पहाड का कोई छोडा मोटा टुकडा नही है । ऊपर चढकर पता चलता है कि पूरब से पश्चिम मे इसकी चौडाई लगभग दो किमी और उत्तर से दक्षिण की लंबाई लगभग 1 किमी है ।
टाईगर हिल से दुशमन को पीछे धकेल दिया गया था । मगर वहाँ पर दो चौकिया बडी ही अहम थी , टाईगर हिल टाॅप से लगभग 300 मीटर दूर "इंडिया गेट" और उससे लगभग 200 मीटर पर स्थित "हैलमेट" .........
18 ग्रेनेडियर पर पाकिस्तान की तरफ से भीषण बमबारी हो रही थी । लेफ्टिनेंट बलवान सिंह की घातक टुकडी के प्राण संकट मे थे । स्थिति की गंभीरता को भाँपकर , ब्रिगेडियर बाजवा ने , 8th बटालियन सिक्ख रेजीमेंट की एक टुकडी (दो अफसर , 8 JCO और 46 जवानो को लेफ्टीनेंट सहरावत, और लेफ्टीनेंट रविन्द्र परमार के आधीन हैलमेट और इंडिया गेट पर काबिज होने का हुक्म दिया था ।
एक लंबी दाढी वाला पाकिस्तानी अफसर , बार बार भीषण काऊंटर अटैक कर रहा था । दोनो अफसर बुरी तरह घायल थे , 19 से ज्यादा लोग शहीद हो चुके थे । टाईगर हिल पर घमासान लडाई हो रही थी । 8th सिक्ख की ये स्पेशल टीम अपना अस्तित्व बचाने , और 18 ग्रेनेडियर की घातक टुकडी की सलामती के लिए , खून बहाकर पीछे हट रहे थे । पाकिस्तानी अफसर , बार बार लगातार भीषण काउंटर अटैक करके हैलमेट और इंडिया गेट पर लगभग दुबारा कब्जा करने सफल हो चुका था ।
दोनो अफसरो की हालत खराब थी, सूबेदार निर्मल ने कमान संभाली , वो सिपाही सतपाल सिंह के साथ अंतिम पोजीशन को संभाले थे , और वायलेस के जरिये सीधे ब्रिगेडियर बाजवा के संपर्क मे थे । सिपाही सतपाल सिंह की हालत खराब थी , उसे चार गोलियां लगी थी , और वो इंडिया गेट , और हैलमेट के बीच पत्थरो मे अपने सूबेदार निर्मल सिंह के साथ पडा था । बाजी हाथ से फिसल चुकी थी ।
तभी सूबेदार निर्मल सिंह ने नारा लगाया ,बोले सो निहाल , और वाक्य पूरा होने से पहले ही पाकिस्तानी गोली उनके माथे मे लगी , और तत्काल उनकी शहादत हो गई ।
सतपाल घायल पडा था , ब्रिगेडियर बाजवा सेट पर लगातार चीख रहे थे । मगर दूसरी तरफ जवाब देने के लिए कोई था ही नही । चार गोली लगी थी हिलना डुलना भी मुश्किल था । सतपाल किसी तरह खुद को घसीटकर रेडियो सेट तक लाया । ब्रिगेडियर बाजवा ने सिपाही से पूछा कि आखिर हो क्या रहा है वहाँ ????
सतपाल ने बताया कि पाकिस्तानी बार बार पीछे हटते है , मगर वो एक आदमी बार बार उन्हे वापिस ले आता है । और हर बार अटैक पहले से भीषण होता है ।
बाजवा ने पूछा कि ये "वो" कौन है ।
सर ,एक हरा ट्रैकसूट पहने , लंबी दाढी वाला कोई पाकिस्तानी है, जो गालियां बककर , चीख चीख कर बार बार उन्हे लेकर आता है ।
बाजवा समझ चुके थे कि जरूर कोई काबिल और दिलेर अफसर बार बार काऊंटर आॅफेन्सिव कर रहा है । बाजवा ने कहा , रिलेक्स सतपाल बेटा रिलेक्स हो जाओ ......
ये बताओ कि वो हरे ट्रैक सूट वाला फिलहाल कहाँ है ??? सतपाल ने बताया कि लगभग 15 मीटर दूर पत्थर के पीछे 10-15 पाकिस्तानियो को लेकर , फिर से काउंटर अटैक की फिराक मे है ।
साहब मुझे भी कई गोलियां लगी है , मै किसी भी वक्त मरने वाला हूँ । ब्रिगेडियर MPS बाजवा ने मर रहे जवान की हिम्मत बँधाई और कहा कि बेटा , मरने से पहले बस एक बार उस हरे ट्रैक सूट वालया नू चक ले ।
ठीक उसी वक्त पाकिस्तानियो ने गोलियां बरसाते हुए सतपाल की पोजीशन की तरफ दौड लगा दी । साँस खींचकर सतपाल ने किसी तरह खुद को खडा किया और पत्थर की आड से निकलकर सामने आ गया । कुल तीन मीटर की दूरी से उसकी LMG से ब्रस्ट निकला , और सबसे आगे दौडते हरे ट्रैक सूट वाले पाकिस्तानी कैप्टन करनैल शेर खान के प्राण पखेरू उड गये ।
बाद मे भारतीय ब्रिगेडियर ने एक चिट्ठी लिखकर उसकी जेब मे रख दी । उसी चिट्टी के कारण पाकिस्तानी अफसर को पाकिस्तान के सर्वोच्य सैन्य सम्मान "निशान ए हैदर" (परमवीर चक्र के समतुल्य)से नवाजा गया । उसके बाद टाईगर हिल पर कोई काउंटर अटैक नही हुआ ।
सतपाल को रेस्क्यू कर लिया गया । सालो मिलिट्री हाॅस्पिटल मे बिताने के बाद , उन्हे तीसरे सबसे बडे युद्ध सम्मान "वीर चक्र" से सम्मानित करके मेडिकल ग्राउंड पर रिटायर कर दिया गया ।
बाद मे उन्हे पंजाब पुलिस मे ट्रैफिक विभाग मे सिपाही के तौर पर ले लिया गया । 2019 मे कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने भारी दबाव , के चलते उन्हे हैड कांस्टेबल से ASI के पद पर प्रोन्नत किया है ।
ये है सतपाल , और उनकी Unsung tale of valour .....
साभार राजीव कुमार
कारगिल दिवस के मौके पर रिपोस्ट

