शरीर से छूटे वह त्याग व जो मन से छूटे वह वैराग्य : पंडित कृष्ण मेहता
चंडीगढ़:- 28 सितंबर:- आरके विक्रमा शर्मा+ करण शर्मा प्रस्तुति:–.त्याग बाहरी है। वैराग्य आंतरिक है पर दोनों अवस्थाओं मे वैष्णव का एक भाव तो दृढ है ही कि “अपने समेत सब प्रभु का है”। शरीर से त्यागने पर त्यागकर्ता अलग खडा रहता है। मन से त्यागने पर त्यागकर्ता अलग खडा नहीं रह सकता। त्यागने की बात…

