नववर्ष हमें स्वीकार नहीं,,,,,राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ” दिनकर ” जी की कविता
चंडीगढ़:30 दिसंबर आरके विक्रमा शर्मा करण शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति:—— ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो रीत नहीं है अपना ये व्यवहार नहीं धरा ठिठुरती है सर्दी से आकाश में कोहरा गहरा है बाग़ बाज़ारों की सरहद पर सर्द हवा का पहरा है सूना है प्रकृति…

