इंसान अपने ही दूसरे जन्म में जाने से डरता है यानि मौत से
चंडीगढ़ 2 मई :- आरके विक्रमा शर्मा:— *अपनी मृत्यु… अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है बाकी तो मौत का उत्सव मनाता है मनुष्य…* मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य *थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है……* …*मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है ।* बकरे का,…

