पावन सनातनी हिंदू मंदिरों तीर्थों को पतित करते तथाकथित धर्माचार्यों पुजारियों गोसाईं ठेकेदारों से करवाओ मुक्त

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चंडीगढ़/मुम्बई/ जैसलमेर/गाजियाबाद/ वृंदावन जे एंड के — शनिवार 10 जनवरी 2026– आर विक्रमा शर्मा हरीश शर्मा अनिल शारदा अश्विनी शर्मा अरुण कौशिक चंद्रभान सोलंकी दिलीप शुक्ला एडवोकेट एके वबोरिया — धरती पर सबसे पौराणिक और सृष्टि सृजन हार द्वारा स्थापित सनातन धर्म सदियों से चराचर जगत का सृजन करते हुए पालन पोषण और फिर मोक्षधाम की राह प्रशस्त कर रहा है। भारत में यहां वहां यदा कदा भगवान ने समय-समय पर जन्म लेकर अधर्मियों का नाश करते हुए धर्म में आस्था विश्वास रखने वाले समाज का मार्गदर्शन किया है। और जीवन को परमार्थी सर्वमान्य और सम्मानजनक बनाने के लिए गीता उपदेश तक अपने मुखारविंद से रची है। सनातनी धर्म दर्शन सदा असीम धर्म धरोहर धार्मिक ग्रंथो मंदिरों और पुराने ऐतिहासिक तीर्थ स्थलों की पूंजी का स्वामी है। लेकिन दुर्भाग्यवश आज इसी सनातनी परंपरागत पूंजी को कुछेक बाहुबली पुजारी लोग धर्म आचार्य बड़े-बड़े कथा वाचन करते व्यास जी यहां तक के तथाकथित महामंडलेश्वर पांडे और ज्योतिष आचार्य आदि दीमक की तरह चाट रहे हैं। और खुद ही सनातन धर्म की पतित हानि कर रहे हैं। बड़े-बड़े मंदिरों के चढ़ावों पर, सत्ता पर काबिज रहने वाली, लंबे समय तक देश का प्रशासनिक संचालन करने वाली, कांग्रेस आई सरकार ने सनातन धर्म विरोधी कानून बनाकर सनातन विरोधियों को मंदिरों का बेशुमार धन-दौलत लूटने का रास्ता बनाया है। आज दुनिया के सबसे बड़े सनातन धर्म को विदेशों में स्वेच्छा से सर्वमान्य मान्यता मिल रही है । लेकिन अपने ही भारत देश में अपने ही सनातन धर्म को लोभी लालची बलात्कारी और राजनीतिक सत्ताधारी गंदी दीमक की तरह अपने ही सनातनी धर्म ठेकेदारों के साथ मिलकर पद दलित कर रहे हैं। और सनातन धर्म का एक विशालकाय सनातनी वर्ग बधिर व मूकदर्शक बना हुआ है। सभी की यह लूट खसूट धन की चोरी, चढ़ावे में मोटी दक्षिणा लेकर प्रभु दर्शन कराए जाने की रिश्वतखोरी तत्काल प्रभाव से सकल कानून बनाकर रोकी जानी चहिए। मंदिरों का बेशुमार चढ़ावा सनातनी मंदिरों के जीर्णोद्धार पर और सनातनी जनजीवन को सुधारने में सुसंस्कृत बनाने में लगाया जाना चाहिए। सनातन धर्म में हमेशा मिल बाटकर भोजन प्रसादी खाने की आदि अनादि मूल परंपरा रही है। उन परंपराओं को पुन स्थापित किया जाए। भंडारा परंपरा हजारों सालों से सनातनी मूल परंपरा रही है। सनातनी धर्म स्थलों के आसपास सिर्फ और सिर्फ सनातनी धर्म परंपराओं में मूल आस्था और श्रद्धा रखने वाले सनातनी समाज को ही रहने का मूल अधिकार दिया जाए।। मंदिरों में चढ़ावे की जमा पुंजी मंदिरों के और सनातनियों के उत्थान में लगाए जाने की सुदृढ़ सुव्यवस्था संविधान और धर्म के अंतर्गत की जाए। बहुत सारे सनातनी धर्म व्रती मंदिरों के जीर्णोद्धार और धर्म की पुनः आस्था स्थापन के लिए जिंदगी भर की पूंजी और अपना जीवन तक न्योछावर कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ लोभी लालची धर्म को पतित करने वाले मंदिरों के अंदर और बाहर ठेकेदार बने हुए नीच दुराचारी व्याभिचारी समाज धर्म की हानि करने में सक्रियता से भूमिका निभा रहे हैं। और इन ठगबाज दुराचारियों की धर्म-कर्म की आड़ लेकर धर्म को हानि पहुंचाने वालों की संख्या विशालकाय है। स्मरण रहे कुरुक्षेत्र की धर्म-कर्म भूमि पर सृष्टि सृजनहार भगवान श्री कृष्ण जी महाराज ने इस विशालकाय कौरव मंडल का धर्म-कर्म में आस्था रखने वाले मुट्ठी भर सनातनी पांडवों द्वारा सर्वनाश करवा कर एक उदाहरण रचा था। आज उसी उदाहरण का सनातनियों को अपने जीवन में आचरण आत्मसात करना होग।अल्फा न्यूज़ इंडिया” अपने प्ररेणा पुंज प्रबंध संस्थापक सम्पादक* धर्म व्रती समाज सेवक पंडित रामकृष्ण शर्माजी की की प्रेरणा और मार्गदर्शन में सनातनी महामंडलेश्वर व स्वामियों, पीठाधीश्वरों और धर्म आचार्यों सहित धर्म प्रचारकों, सहारा संरक्षण देने वालों से आग्रह करता है कि सनातन के लिए समय और परिस्थितियों को समझ कर समग्रता से एकमत होकर सकारात्मक सफल कार्यवाही करनी चाहिए।। मौजूदा समय में नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज सनातन धर्म की परम्पराओं को आदि अनादि शिष्ट पुष्ट परम्पराओं को धर्मावत प्रचारित और प्रसारित करने में भागीरथी भूमिका निभाते हुए भावी पीढ़ी को सनातन से जोड़ने का और जोड़े रखने का “अनुकरणीय कार्य” भारत राष्ट्र के गरिमामय उत्थान के लिए कर रहे हैं। आइए!! सनातन धर्म में फलती फूलती विषैली अधर्मी कुत्सित मानसिकताओं से उपजती कुरीतियों विषमताओं के निवारण व समूल विनाश के लिए सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री तुल्य पदभार प्राप्त स्वामी रसिक महाराज, नृसिंह पीठाधीश्वर के पदचिन्हों पर चलकर अपने सनातन धर्म के प्रति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।।

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