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चंडीगढ़ पंचकूला 10 सितंबर 2025 आर विक्रम शर्मा हरीश शर्मा अश्विनी शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा प्रस्तुति-— नोनी के रूप में वैज्ञानिकों को एक ऐसी संजीवनी हाथ लगी है।
नोनी फल आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद।
मधुमेह, अस्थमा, गठिया, दिल की बीमारी, स्त्रियों की बीमारिया, नपुंसकता एवम् बांझपन सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित हो रहा है।
ताजा शोध के मुताबिक नोनी फल कैंसर व लाइलाज एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों में भी कारगर साबित हो रहा है।
भारत में वर्ल्ड नोनी रिसर्च फाउंडेशन सहित कई शोध संस्थान शोध कर रहे हैं।
नोनी के इन रहस्यमयी गुणों का खुलासा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में एक सेमिनार में हुआ।
कृषि वैज्ञानिक नोनी को मानव स्वास्थ्य के लिए प्रकृति की अनमोल देन बता रहे हैँ एवम् उनके अनुसार समुद्र तटीय इलाकों में तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, गुजरात, अंडमान निकोबार, मध्यप्रदेश सहित नौ राज्यों में 653 एकड़ में इसकी खेती हो रही है।
कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व चेयरमैन व वर्ल्ड नोनी रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कीर्ति सिंह ने कहा कि इस फल में दस तरह के विटामिन, खनिज पदार्थ, प्रोटीन, फोलिक एसिड सहित 160+ पोषक तत्व हैं।
इतने पोषक तत्वों की मौजूदगी के चलते उच्च रक्तचाप, हृदय, मधुमेह, गठिया, सर्दी जुकाम, नपुंसकता, स्त्री रोगों सहित अनेक बीमारियों में औषधि के रूप में काम आता है।
यह वो एंटीऑक्सिडेंट है जिसे यदि शुरू से इसका सेवन किया जाए तो कैंसर नहीं होगा। फाउंडेशन कैंसर व एड्स पर नोनी के प्रभाव का शोध कर रहा है।
इंदौर में करीब 25 एड्स मरीजों को नियमित नोनी का जूस देने पर वे अब तक ठीक हैं।
इसके अलावा मुंबई, बेंगलुर, हैदराबाद, चेन्नई सहित कई मेट्रो शहरों में दर्जनों कैंसर पीडितों को यह दिया गया था, जिन्हें अस्पतालों ने डिस्चार्ज कर दिया था।
जिन मरीजों को नोनी दिया जा रहा है, उनकी उम्र बढ़ गई है।
अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि नोनी के सेवन से कैंसर व एड्स पूरी तरह ठीक ही हो जाएगा, पूरे विश्व में शोध जारी है।
नोनी की उपयोगिता को ध्यान रखकर ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में दो साल से नोनी को शामिल कर लिया है क्योंकि ये हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।
हमारा नोनी जूस अद्भुत फ़ॉर्मूलेटेड है क्योंकि इसके 10ml में आपको मिलता है…
3000mg नोनी
300mg अश्वगंधा
100mg गरसेनिया कम्बोजिया
मात्रा 400ml
एमआरपी ₹850/- लेकिन आपको मिलेगा डिस्काउंट के साथ सिर्फ ₹625/- में।
साथ में कोरियर सेवा मुफ्त एवं आजीवन निशुल्क स्वास्थ्य सलाह प्रतिदिन 12 से 5 बजे तक।
हाल ही में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि भारतीय गाय के दूध में मिलने वाले प्रोट्रीन से हृदय घात, डायबिटीज और मानसिक रोग को ठीक करने में अहम होता है।
दुनिया में पाई जाने वाली गायों में से भारत की गाय को सबसे उत्तम माना गया है।
भारतीय गाय के दूध में ताकत और पौष्टिकता अधिक होती है।
नई रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि भारतीय नस्ल की गाय में सन ग्लैंडस होती है जो उसके दूध को पौष्टिक्ता के साथ औषिधी रूप में बदल देती है।
पेट के कैंसर और टयूमर खतरा कम करती है…
नए शोध से पता चला है कि एशिया में गैस्ट्रिक कैंसर से प्रभावित रोगियों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है जिस वजह से मौतें भी अधिक हो रही है।
इस दिशा में गाय का दूध एक महत्वपूर्ण औषधि का कार्य करती है।
शोधकर्ताओं के अनुसर कोलोन कैंसर यानी पेट के कैंसर को शुरूआती दौर में रोकने के लिए गाय का दूध बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
यह कैंसर की कोशिकाओं से होने वाले खतरे को कम कर देता है।
टयूमर को बढ़ाने वाले बेसलिन के प्रभाव को कम करने में गाय के दूध के पौष्टिक तत्व काफी अहम होते हैं।
स्वाइन फलू से बचाये…
नए शोध में इस बात का पता लगाया गया है कि एच1-एन1 वायरस से बचने के गाय का पहला दूध सबसे महत्वपूर्ण होता है।
गाय के दूध के प्रयोग से बन रही एंटी बायोटिक्स के जरिए स्वाइन फलू वायरस को खत्म किया जा सकता है।
नई रिर्सच में इस बात का भी पता चला है कि ए-1 जीन गाय में पाया जाता है।
यह जीन दिमाग के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
गाय के दूध का रंग थोड़ा पीला होता है इसकी वजह है कि गाय के दूध में पाया जाने वाला सन ग्लैंडस है।
यह शरीर को मजबूत करता है और आंतों की बीमारी में लाभ देता है।।
स्वस्थ एवं निरोगी जीवन के लिए अपनायें, देसी गाय का दूध, दही, घी और छांछ।
ये रिफाइन्ड तेल बनता कैसे हैं.?
मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें…
तो बात समझ जायेंगे.!
किसी भी तेल को रिफाइन्ड करने में 6 से 7 केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन्ड करने में ये संख्या 12-13 हो जाती है.!
ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में,
भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ऑर्गेनिक कहते हैं.!
तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब इनऑर्गेनिक हैं और इनऑर्गेनिक केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका कॉम्बिनेशन जहर के तरफ ही ले जाता है.!
इसलिए रिफाइन्ड तेल, डबल रिफाइन्ड तेल गलती से भी न खाएं.!
फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं..??
तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, राइसब्रान या नारियल का.!
अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है.!
हम लोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहें कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन, उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है.!
तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा,
फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है
वो उसका प्रोटीन कंटेंट है,
शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है,
दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है,
दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है,
तो तेलों में जो बास या महक आप पाते हैं वो उसका ऑर्गेनिक कंटेंट है प्रोटीन के लिए.!
4-5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका फैटी एसिड गायब.!
अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है,
जहर मिला हुआ पानी.!
और ऐसे रिफाइन्ड तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द..
ये तो छोटी बीमारियाँ हैं।
सबसे खतरनाक बीमारी है,
हृदयघात या हार्ट अटैक,
पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना आदि आदि.!
जिन जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन्ड तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे,
अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन्ड तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ हार्ट ब्लॉकेज और हार्ट अटैक की समस्याएं हो रही है.!
जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया,
सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डॉक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई
तो उन्होंने भी इस पर काम किया और उन डॉक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा,
“तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन्ड में तो कुछ भी नहीं रहता,
वो छूँछ बच जाता है और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है.!”
आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा.?
मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है..
HDL
(High Density Lipoprotin),
ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब.!
आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे.!
अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है.!
मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से भी जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक दो टन नहीं, लाखो करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है.!
7-8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है.!
भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन्ड तेल और डबल रिफाइन्ड तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है,
वो पामोलिन तेल है.!
और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बीमारियों से मरेगा.!
क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी घुलते (Dissolve) नहीं हैं, किसी भी तापमान पर घुलते नहीं और ट्रांस फैट जब शरीर में घुलता या Dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस तक का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है.!
रिफ़ाइण्ड तेल की जगह कच्ची घानी तेल या मूंगफ़ली, सरसों, राइसब्रान आयल, तिल का तेल ही खाएँ, लेकिन कभी भी किसी भी कम्पनी का कच्ची घानी न खायें क्योंकि उसमें पाम आयल मिलाने के लिये वो ऑथोराइज़ होते हैं।
गुड़ में विटामिन और मिनरल्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है।
गुड़ की एक खासियत ये भी है कि अगर ये केमिकल मुक्त है तो इसे डायबिटीज़ के मरीज़ भी खा सकते हैं।
गुड़ खाने के 8 चमत्कारी फायदे..
(1). गुड़ शरीर की एनर्जी को बढ़ाता है…
बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने वाले लोगो को भी गुड़ बहुत फायदा करता है।
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर भी नहीं बढ़ती और आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। दिन भर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खायें थकान कुछ ही देर में दूर हो जाएगी।
(2). हड्डियों को मजबूत करता है..
अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो गुड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
गुड़ में मौजूद कैल्शियम के साथ फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करता है।
इसके अलावा रेगुलर गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक को लेने से सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्या नहीं होती।
बुजुर्गों को गुड़ की रोटी खाने से भी काफी फायदा होगा इसलिए हर खाने में चीनी की जगह गुड़ के सेवन करना बेहतर होगा।
(3). आयरन की कमी दूर करता है..
ऐसे बहुत सी चीज़े हैं जिनके सेवन से आयरन की कमी दूर होती है लेकिन गुड़ ऐसा है जिसमें आयरन बहुत ज्यादा पाया जाता है।
यानी गुड़ आयरन का एक प्रमुख स्रोत है।
यह एनीमिया के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसलिए एनीमिया के शिकार लोगों को चीनी की जगह पर गुड़ खाने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत जरूरी होता है।
(4). पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है…
स्वादिष्ट होने के साथ गुड़ में खून को शुद्ध करने के गुण होते हैं।
इससे शरीर के सभी टॉक्सिक सब्सटेन्स आसानी से बाहर निकल जाते हैं। इसलिए गुड़ को खाने से मेटाबॉल्जिम ठीक रहता है।
रेगुलर एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ को खाने से पेट ठीक रहता है।
इसके अलावा पेट की गैस की परेशानी वाले लोगों को भी समस्या से बचने के लिए खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाना चाहिए इससे गैस दूर होगी ।
(5). खांसी जुकाम ठीक करता है…
गुड़ की तासीर गर्म होने की वजह से इसके सेवन से जुकाम और खांसी में काफी आराम मिलता है।
जुकाम के दौरान कच्चा गुड़ खाने से बचें इसे चाय में या लड्डू बनाकर इस्तेमाल करना चाहिए।
इसके अलावा गले में खराश के कारण आवाज बैठ जाने की समस्या होने पर दो काली मिर्च, 50 ग्राम गुड़ के साथ खाने से यह समस्या दूर हो जाती है और गले को भी आराम मिलता है।
(6). महिलाओं के लिए फायदेमंद…
जिन महिलाओं या लड़कियों को पीरियड्स के दौरान पेट दर्द होता है, उनके लिए गुड़ काफी फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें कई विटामिन और मिनरल्स होते है।
गुड़ आपके पाचन को सही रखता है इसलिए पीरियड्स के दौरान गुड़ खाने से दर्द कम होता है और ये शरीर को गर्म रखने में मदद करता है।
(7). त्वचा के लिए गुणकारी…
गुड़ स्किन के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
यह आपकी स्किन को हैल्दी और अट्रेक्टिव बनाने में मदद करता है।
गुड़ खून से खराब टॉक्सिन को दूर करने में मदद करता है जिससे ब्लड साफ हो जाता है। जिससे आपकी त्वचा चमक आ जाती है साथ ही मुहांसे और झुर्रियों की समस्या भी दूर होती है।
(8). अस्थमा में फायदेमंद…
अस्थमा के मरीज़ों को भी गुड़ खाने की सलाह दी जाती है। गुड़ शरीर के तापमान को कंट्रोल करता है और इसमें एंटी एलर्जिक गुणों के कारण इसका सेवन अस्थमा के मरीजों के लिए काफी लाभकारी होता है।
जानिए सेंधा नमक के 10 अद्भुत फायदे..
- सेंधा नमक हड्डियों को मजबूत रखता है।
- मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या सेंधा नमक के सेवन से ही ठीक हो सकती है।
- नियमित सेंधा नमक का सेवन करने से प्राकृतिक नींद आती है। यह अनिंद्रा की तकलीफ को दूर करता है।
- यह साइनस के दर्द को कम करता है।
- शरीर में शर्करा को शरीर के अनुसार ही संतुलित रखता है।
- पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
- यह शरीर में जल के स्तर की जांच करता है जिसकी वजह से शरीर की क्रियाओं को मदद मिलती है।
- पित्त की पत्थरी व मूत्रपिंड को रोकने में सेंधा नमक और दूसरे नमकों से बेहद उपयोगी है।
- पानी के साथ सेंधा नमक लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
- सेंधा नमक का सेवन दमा के रोगीयों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
● सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद, गर्म पानी पीने से, पाचन संबंधी दिक्कते, खत्म हो जाती है, व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
● भूख बढ़ाने में भी, एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
● खाली पेट गर्म पानी पीने से; मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में, गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
● गर्म पानी के नियमित सेवन से, ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से, शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
● बुखार में प्यास लगने पर, मरीज को, गर्म पानी ही पीना चाहिए।
● यदि शरीर के किसी हिस्से में, गैस के कारण दर्द हो रहा हो, तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।

● अधिकांश पेट की बीमारियां, दूषित जल से होती हैं, यदि पानी को गर्म करके, फिर ठंडा कर पीया जाए, तो जो पेट की अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
● सुबह खाली पेट, एक गिलास गर्म पानी में, एक नींबू मिलाकर पीने से, शरीर को विटामिन सी मिलता है। गर्म पानी व नींबू का कॉम्बिनेशन, शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है साथ ही पी.एच. का स्तर भी, सही बना रहता है।
● रोजाना एक गिलास गर्म पानी, सिर के सेल्स के लिए, एक गजब के टॉनिक का काम करता है । सिर के स्केल्प को, हाइड्रेट करता है, जिससे स्केल्प ड्राय होने की प्रॉब्लम खत्म हो जाती है।
● वजन घटाने में भी, गर्म पानी बहुत मददगार होता है। खाने के एक घंटे बाद, गर्म पानी पीने से बॉडी स्लिम हो जाती है।
क्या आप जानते हैं कि एलोवेरा के प्रयोग से क्या क्या अद्भुत एवं चमत्कारी फ़ायदे मिलते हैं.?
आयुर्वेद में एलोवेरा को जड़ी बूटियों में महाराजा का स्थान दिया गया है एवं औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है।
इसकी कई प्रजातियां होती हैं, लेकिन प्रथम 5 प्रजातियां ही मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं।
जिसमें बारना डेंसीस नाम की जाति प्रथम स्थान पर है।
एलोवेरा देखने में यह अवश्य अजीब सा पौधा है लेकिन इसके गुणों का कहीं कोई अंत नहीं है।
यह जहां त्वचा की खराबी, धूप से झुलसी त्वचा, गर्भाशय के रोग, आंखों के काले घेरों, बवासीर, डायबिटीज पेट की खराबी, जोड़ों का दर्द, मुंहासे, रूखी त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग-धब्बों, फटी एड़ियों के लिए यह फ़ायदेमंद है वहीं दूसरी तरफ यह खून की कमी को दूर करता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमीनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं।
इसकी तासीर गर्म होती हैं।
यह खाने में बहुत पौष्टिक होता है।
इसे त्वचा पर लगाना भी उतना ही लाभप्रद होता है।
इसकी कांटेदार पत्तियों को छीलकर एवं काटकर रस निकाला जाता है।
3-4 चम्मच रस या कुछ कैप्सूल्स, सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में शक्ति व चुस्ती स्फूर्ति बनी रहती है।
इसे संजीवनी के नाम से संबोधित करना किसी भी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं कहलाई जा सकती है।
इसकी पूरे विश्व भर में 400 से ज़्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं हैं, परंतु इनमें से केवल 5 प्रजातियां हीं हमारे स्वास्थ्य के लिए गुणकारी हैं।
नोट:
12 साल से कम उम्र के बच्चों को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।
एलोवेरा का लगातार सेवन आपके ब्लड प्रेशर को लो कर सकता है।
ऐसे में जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से ही काफी लो रहता हो वो इसका सेवन अपने डॉक्टर से पूछकर ही करें।
जिन लोगों को दिल से संबंधित कोई परेशानी है उन्हें एलोवेरा का सेवन करने से बचना चाहिए।
एलोवेरा बहुत प्रभावकारी है इसलिए लोग सेहत के नाम भोले भाले लोगों को लूट रहे हैं।
बचिये ऐसे लोगों से और ऐसी जबरदस्त कम्पनियों से।
हमारे बनाये हुये एलोवेरा कैप्सूल्स सर्वोत्तम एलोवेरा से बनाये गये हैं।
पैकिंग 60 कैप्सूल्स
सहयोग राशि ₹310/-
मंगवाने के अपना पूरा पता, पिन कोड, मोबाइल नंबर एवं क्वान्टिटी टेक्स्ट मेसेज से भेजें।
ऑफर 3 के साथ एक फ्री
कोरियर एकदम फ्री
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ज्यादा जानकारी के लिए कभी भी सम्पर्क करें…
अल्फा न्यूज़ इंडिया कार्यालय मोबाइल नंबर 9463986540 व्हाट्सएप।।

