गणेश विसर्जन अहंकार त्याग कर जीवन के हर पल का उत्सवपूर्वक स्वागत करने का संदेश

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चंडीगढ़ 06 सितंबर 2025 आरके विक्रमा शर्मा हरीश शर्मा अनिल शारदा अश्विनी शर्मा प्रस्तुति— प्रभु गणेश जी की अनन्त चतुर्दशी हिन्दू पंचांग के भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन दो दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है। पहला – यह व्रत भगवान विष्णु के अनन्त रूप की उपासना हेतु समर्पित है। दूसरा – इसी दिन गणेशोत्सव का समापन होता है और गणपति बप्पा का उत्साहपूर्ण विसर्जन किया जाता है। अनन्त चतुर्दशी का महत्व….इस दिन श्रद्धालु “अनन्त व्रत” करते हैं। व्रतधारी हाथ में अनन्त सूत्र (कुशा या रेशमी डोरी में चौदह गांठें) बाँधते हैं, जो भगवान विष्णु के अनन्त स्वरूप का प्रतीक है। इस सूत्र का अर्थ है— जीवन में अनन्त सुख, समृद्धि, शांति और संरक्षण। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के दुख, बाधाएँ और आर्थिक संकट दूर होते हैं। अनन्त चतुर्दशी का व्रत केवल पुरुष ही नहीं बल्कि स्त्रियाँ भी करती हैं। व्रत कथा में राजा सुतल और युधिष्ठिर के प्रसंग आते हैं, जो यह सिखाते हैं कि अनन्त भगवान की शरण में जाने से हर विपत्ति का समाधान होता है। गणेश विसर्जन का पर्व. .. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से आरम्भ होकर अनन्त चतुर्दशी तक दस दिन गणेशोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश जी की स्थापना होती है। लोग उत्साहपूर्वक भजन, पूजन, हवन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। अनन्त चतुर्दशी के दिन धूमधाम से शोभायात्रा निकालकर गणेश जी की मूर्ति का जल में विसर्जन किया जाता है। इसे “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ विदाई दी जाती है। यह विसर्जन हमें यह संदेश देता है कि जीवन क्षणभंगुर है— जो आया है, उसे एक दिन विदा लेना ही होता है। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश….अनन्त चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का संगम भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक है। अनन्त व्रत हमें जीवन की कठिनाइयों में ईश्वर पर विश्वास रखने की प्रेरणा देता है। गणेश विसर्जन हमें अहंकार त्यागकर जीवन के हर पल का उत्सवपूर्वक स्वागत करने का संदेश देता है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है। अतः अनन्त चतुर्दशी केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। नेचुरोपैथ कौशल..ll

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