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चंडीगढ़:- 24 जुलाई:- अल्फा न्यूज़ इंडिया डेस्क:– मौजूदा जवान हो रही पीढ़ी और उम्र की ढलान पर बैठी पीढ़ी को यह वर्ष 2020 आखरी दम तक याद रहेगा।। यह फर्स्ट कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के दिए गए प्रचंड आधा तो जख्मो कि 30 बना रहेगा हालांकि इस महामारी ने इंसानियत के और भौतिकवाद के आधुनिकता के और विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से बखूबी खूब गहरे तक रूबरू करवा दिया है इंसान को अपने पराए की परख बखूबी करवा दी गई है। इंसान को इंसान की अहमियत से वाकिफ करवा दिया है। और तो और आदमी को अपने अंदर झांक लेने, समझने और खुद को खुद से तुलना करने का नया मौका दिया है। और अगर अभी हम लोग कुछ नहीं समझे, तो फिर हम कभी भी जीवन पर्यंत भी नहीं समझ पाएंगे।।।
*॰एक साल ऐसा भी -*
“`ना अचारों की खुशबू,
ना बर्फ की चुस्की,
ना गन्ने का रस,
ना मटके की कुल्फी ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना शादियों के कार्ड,
ना लिफाफों पर नाम,
ना तीये का उठावना,
ना दसवें की बैठक ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना साड़ी की खरीदारी,
ना मेकअप का सामान,
ना जूतों की फरमाइश,
ना गहनों की लिस्ट ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना ट्रेन की टिकट,
ना बस का किराया,
ना फ्लाइट की बुकिंग,
ना टैक्सी का भाड़ा ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना नानी का घर,
ना मामा की मस्ती,
ना मामी का प्यार,
ना नाना का दुलार ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना पिता का आंगन,
ना माँ का स्वाद,
ना भाभी की मनुहार,
ना भाई का उल्लास ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`ना मंदिर की घंटी,
ना पूजा की थाली,
ना भक्तों की कतार,
ना भगवान का प्रसाद ॥“`
*॰एक साल ऐसा भी..*
“`
सदा रहेगा
इस साल का मलाल,
जीवन में फिर
कभी न आये ऐसा साल।।“`
साभार व्हाट्सएप यूजर से।।।

