शास्त्रों अनुसार पूजा, अर्चना और उपायों में वर्जित कार्य

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चंडीगढ़ रविवार 01/02/2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा — शास्त्रों के अनुसार पूजा, अर्चना और उपायों में वर्जित कार्य :: ज्ञान दर्पण १) गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं२) देवी पर दुर्वा न चढ़ाएं३) शिव लिंग पर केतकी फूल न चढ़ाएं४) विष्णुजी को तिलक में अक्षत न चढ़ाएं५) दो शंख एक पूजा घर में न रखें६) मंदिर में तीन गणेश मूर्ति न रखें७) तुलसी पत्र चबाकर न खाएं८) द्वार पर जूते चप्पल उल्टे न रखें९) दर्शन करके बापस लौटते समय घंटा न बजाएं१०) एक हाथ से आरती नहीं लेना चाहिए११) ब्राह्मण को बिना आसन बिठाना नहीं चाहिए१२) स्त्री द्वारा दंडवत प्रणाम वर्जित है१३) बिना दक्षिणा ज्योतिषी से प्रश्न नहीं पूछना चाहिए१४) घर में पूजा करने अंगूठे से बड़ा शिवलिंग न रखें१५) तुलसी पेड़ में शिवलिंग किसी भी स्थान पर न हो१६) गर्भवती महिला को शिवलिंग स्पर्श नहीं करना है१७) स्त्री द्वारा मंदिर में नारियल नहीं फोडना चाहिए१८) रजस्वला स्त्री का मंदिर प्रवेश वर्जित है१९) परिवार में सूतक हो तो पूजा प्रतिमा का स्पर्श न करें२०) शिव जी की पूरी परिक्रमा नहीं किया जाता२१) शिव लिंग से बहते जल को लांघना नहीं चाहिए२२) एक हाथ से प्रणाम न करें२३) दूसरे के दीपक से अपना दीपक जलाना नहीं चाहिए२४.१)चरणामृत लेते समय दायें हाथ के नीचे एक नैपकीन रखें ताकि एक बूंद भी नीचे न गिरे २४.२) चरणामृत पीकर हाथों को शिर या शिखा पर न पोछें बल्कि आंखों पर लगायें शिखा पर गायत्री का निवास होता है उसे अपवित्र न करें२५) देवताओं को लोबान या लोबान की अगरबत्ती / धूप न करें२६) स्त्री द्वारा हनुमानजी और शनिदेव को स्पर्श वर्जित है२७) कंवारी कन्याओं से पैर पडवाना अर्थात चरण स्पर्श करवाना पाप है२८) मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग दें२९) मंदिर में भीड़ होने पर यदि लाईन पर लगे हुए हों तो भगवन्नामोच्चारण करते रहें एवं अपने क्रम से ही अग्रसर होते रहें३0) शराबी व्यक्ति का भैरव के अलावा अन्य मंदिर प्रवेश वर्जित है३१) मंदिर में प्रवेश के समय पहले दाहिना पैर और निकास के समय बाया पांव रखना चाहिए३२)घंटी को इतनी जोर से न बजायें कि उससे कर्कश ध्वनि उत्पन्न हो३४)हो सके तो मंदिर जाने के लिए एक जोड़ी वस्त्र अलग ही रखें३५) मंदिर अगर ज्यादा दूर नहीं है तो बिना जूते चप्पल के ही पैदल जाना चाहिए३६) मंदिर में भगवान के दर्शन खुले नेत्रों से करें और मंदिर से खड़े खड़े वापिस नहीं हों, दो मिनट बैठकर भगवान के रूप माधुर्य का दर्शन लाभ लें३७) आरती लेने अथवा दीपक का स्पर्श करने के बाद हस्तप्रक्षालन अवश्य करें३८) एक ही माला से जप करना चाहिए, बार-बार माला ना बदले३९) पूजा में एक ही आसन का प्रयोग करें, दूसरे का आसन ना ले४०) श्री राम चरित्र मानस, गीता जी आदि शास्त्रों को जमीन पर ना रखेंयह कुछ बातें शास्त्र सम्मत है अतः इन्हें अपनाए आपकी कर्मकांड पूजा सफल होगी और पूर्ण फल की प्राप्ति होगी।। साभार।।।

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