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चंडीगढ़ 25.06.2025 आर विक्रमा शर्मा अनिल शारदा —- आज सिख पंथ के लिए महान कुर्बानी देने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहादत का दिन है। दिल्ली के महरौली में बाबा बंदा बहादुर को आज ही के दिन तिल तिल करके काटते हुए शहीद किया गया था। इससे पहले बंदा सिंह बहादुर के दोनों बच्चों को बहुत ही निर्माता पूर्वक सीना चीरकर दिल निकाल कर दोनों मां और आप के मुंह में ठूंस दिया गया था। बंदा बहादुर का हाथी पर बिठाकर दिल्ली की गलियों में दर्दनाक जुलूस निकाला गया था। इंसानियत ने भी अपना सर नीचा कर लिया था। बंदा सिंह बहादुर की शहादत ने सिख पंथ की सृजन नींव को सबसे ज्यादा मजबूत करने का काम किया है। वह सही मायने में गुरु के असली सिख साबित हुए। और अपने खून में पूर्वजों के खून और सनातनी संस्कारों के वशीभूत गुरु के वचनों का पालन किया। यहां तक कि अपना परिवार भी न्योछावर कर दिया। जबकि बंदा बहादुर सब झमेले से दूर रह सकते थे। लेकिन सनातन धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि जब गुरु धारण कर लिया है। तो गुरु के हो जाओ। और बंदा सिंह बहादुर ने यह तथ्य साबित कर दी। मुगल उनके नाम मात्र से थरथराते थे। वह अपने खड़गे से एक वार में 20 गर्दनें काटने वाले योद्धा हैं। ऐसे महान गुरु भक्त बंदा बहादुर को सिख पंथ और समूचा सनातन हिंदू समाज नतमस्तक होकर नमन करता है।। गुरु महाराज की रक्षा के लिए बंदा बहादुर ने गुरु महाराज का ही वेशभूषा और स्वरूप धारण कर लिया था मुसलमान उन्हें गुरु गोविंद सिंह समझ कर क्या उम्र उनसे लड़ते रहे और उधर गुरु गोविंद सिंह जी मानवता की सेवा और सुरक्षा के लिए सिख फौजी खड़ी करने में लग रहे बंदा बहादुर ने उन्हें भरपूर अवसर प्रदान किया।ताकि वह बिना किसी अड़चन के अपना मनोरथ सिद्ध कर सके जो सिख पंथ के साथ-साथ मान्यता के कल्याण का द्योतक बना।।


