एंकाकी जीवन का भेद है अलसी साथी परमेश्वर की पहचान

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चंडीगढ़ 14.06.2025 रक्षत शर्मा अनिल शारदा पंकज राजपूत प्रस्तुति— 💐 मैं कौन हूँ? 💐रिटायरमेंट के बाद, जब जीवन में खालीपन और अकेलापन आया, तब आत्मचिंतन की एक गहरी अनुभूति हुई।कृपया ध्यान से पढ़ें और मनन करें…मैं कौन हूँ?मैंने बंगला बनाया, फार्महाउस खरीदा, एक फ्लैट में निवेश किया।फिर भी आज, चार दीवारों में कैद हूँ।साइकिल से शुरुआत की, फिर मोपेड, बाइक और कारें लीं,फिर भी आज, कमरे में नंगे पाँव चलता हूँ।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया, “मैं… मैं हूँ।”मैंने राज्यों, देशों और विदेशों की यात्राएँ कीं,फिर भी आज, मेरा सफर ड्राइंग रूम और रसोई तक सीमित है।मैंने अनेक संस्कृतियाँ और परंपराएँ जानीं,फिर भी आज, अपने ही परिवार को समझने की कोशिश करता हूँ।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया, “मैं… मैं हूँ।”मैंने जन्मदिन, सगाई और शादी को बड़े धूमधाम से मनाया,फिर भी आज, किराने का बजट बनाता हूँ।कभी गायों और कुत्तों के लिए रोटियाँ बनवाता था,फिर भी आज, खुद कुछ निवाले ही खा पाता हूँ।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया, “मैं… मैं हूँ।”सोना, चांदी, हीरे, मोती—सभी तिजोरी में बंद हैं।सूट और ब्लेज़र—अलमारी में करीने से रखे हैं।फिर भी आज, एक साधारण सूती कपड़े में गर्व से घूमता हूँ।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया, “मैं… मैं हूँ।”मैंने अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, हिन्दी सीखी,फिर भी आज, अपनी मातृभाषा में ही समाचार पढ़ता हूँ।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया, “मैं… मैं हूँ।”काम के लिए लगातार यात्रा करता रहा,फिर भी आज, उसके लाभ-हानि पर विचार करता हूँ।मैंने व्यापार खड़ा किया, परिवार बसाया, कई रिश्ते बनाए,फिर भी आज, सबसे गहरा रिश्ता पड़ोसी से है।पढ़ाई में हज़ारों नियमों का पालन किया,फिर भी आज, व्यवहारिक ज्ञान पर निर्भर हूँ।एक पूरी ज़िंदगी संघर्ष और दुनिया के पीछे भागते हुए बीती,और अब पहली बार, जब हाथों में माला घुमा रहा हूँ,तब आत्मा की आवाज़ सुनाई दी।अब बहुत हो चुका…जागो यात्री,अब अंतिम यात्रा की तैयारी का समय है।प्रकृति मुस्कराई और पूछा, “तुम कौन हो, मेरे मित्र?”मैंने उत्तर दिया:**“हे प्रकृति, मैं तुम्हारा ही अंश हूँ।मैं कभी आकाश में उड़ता था,अब धरती पर लौट आया हूँ।मुझे क्षमा करो…एक और मौका दो, जीवन को सही ढंग से जीने का।एक सच्चे इंसान की तरह जीने का…संस्कारों और मूल्यों के साथ जीने का,परिवार और प्रेम के साथ जीने का।”***सभी रिटायर्ड मित्रों के लिए।**ईश्वर आप सभी को आशीर्वाद दे।*।

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