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चंडीगढ़ 7 जून 25 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति — धरती पर सनातन ही अमूल्य धरोहर है यही जीवन का मूल है और मूल जीवन ही सनातन है। यह प्रत्येक मानस के लिए अनिवार्य जीवन आधार है। हर वस्तु का महत्व और उपयोगिता है जो वैज्ञानिक कसौटियों पर भी सर्वोत्तम है। सनातन धर्म में वनस्पति को जीवन का मूल मानकर उसकी पूजा की जाती है। हर पूजनीय पेड़ का जीवन से गहरा संबंध है। बहुत गहन अध्ययन के बाद आप देखेंगे कि हर पेट में शरीर का कोई ना कोई अंग दृष्टिगोचर होता है। उदाहरण के लिए पीपल का पेड़ हमारे दिल का आकार लिए हुए हैं। इन पत्तों को कच्चा चलाया जा सकता है पीसकर शरीर पर लगाया जा सकता है अनेकों शारीरिक व्याधियों को चंडी के रोगों को दूर करते हैं। पपीते का पत्ता उबाल कर पीने से शरीर में कमी दूर होती हैं। शीशम नीम पीपल एलोवेरा और बैल सहित पत्थर्चात का पत्ता बहु उपयोगी वनस्पति है इन पत्तों को कच्चा चबाने से अनेकों रोग दूर होते हैं। या इनको उबालकर भी पिया जा सकता है। इनका नियमित सेवन करने का किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। इस तरह के अनेकों जड़ी बूटियां का खजाना लिए वनस्पति की पूजा होती है यही सनातनी धर्म परंपराओं का कोष धरती पर विद्यमान है। तुलसी के पौधे को तो मां का दर्जा दिया है।।

