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चंडीगढ़ 24 अक्टूबर आरके विक्रमा शर्मा/अनिल शारदा प्रस्तुति—- शब्द ही हमें समाज में घर परिवार में यहां तक कि अपने दिलोदिमाग में भी आत्मबल और आत्मसम्मान दिलाते हैं। विनम्रता और क्षमादान सबसे बड़ी पूंजी है। सहनशीलता ही असली शक्ति है। परोपकार जीवन का सार है बाकी सब बेकार है।
*पैर की मोच*
*और*
*छोटी सोच ,*
*हमें आगे*
*बढ़ने नहीं देती ।*
😔😔😔😔😔😔😔😔
*टूटी कलम*
*और*
*औरो से जलन ,*
*खुद का भाग्य*
*लिखने नहीं देती ।*
😔😔😔😔😔😔😔😔
*काम का आलस*
*और*
*पैसो का लालच ,*
*हमें महान*
*बनने नहीं देता ।*
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👌दुनिया में सब चीज
मिल जाती है,……
केवल अपनी गलती
नहीं मिलती..
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” जितनी भीड़ ,
बढ़ रही
ज़माने में……..।
लोग उतनें ही ,
अकेले होते
जा रहे हैं……।।।
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इस दुनिया के
लोग भी कितने
*अजीब है * ना ;*
*सारे खिलौने*
*छोड़ कर*
*जज़बातों से*
*खेलते हैं........*
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याद रखिये
यदि माता पिता, और सगे भाई बहन से बोलचाल बंद है
*तो ये भी तय मानो कि *भगवानने आपको सुनना बंद कर दिया है
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किनारे पर तैरने वाली
लाश को देखकर
ये समझ आया……..
बोझ शरीर का नहीं
साँसों का था…..
तो फिर घमंड़ शरीर पर कैसा?
😔😔😔😔😔😔
“सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और
जिंदगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए !!
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तज़ुर्बा है मेरा…. मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने …..पाँव फिसलते देखे हैं…!
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जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नहीं,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नहीं जायेगा!
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जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ….
जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए…
👌👌👌👌👌👌👌
पैसा इन्सान को ऊपर ले जा सकता है;
लेकिन इन्सान पैसा ऊपर नहीं ले जा सकता……
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कमाई छोटी या बड़ी हो सकती है….
पर रोटी की साईज़ लगभग सब घर में एक जैसी ही होती है।
:👌 शानदार बात👌
इन्सान की चाहत है कि उड़ने को पर (पंख) मिले,
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले…
आप स्वस्थ,सदा मस्त रहे
🌷🌷💐🙏 साभार व्हाट्सएप से 💐🌷🌷


