![]()

चंडीगढ़– अल्फा न्यूज़ इंडिया प्रस्तुति —- इस्लाम में मुस्लिम मान्यता के अनुसार कोई भी वस्तु हलाल यानि पाक (हिंदी में जिसे पवित्र कहते) तब ही मानी जाएगी, जब उसे वस्तु के अंदर थूका जाएगा। यह तमाम मुसलमान काजी मौलाना मौलवी साहब बखूबी कबूल फरमाते हैं।अतः थूक होने के कारण इस दूषित यानी अपवित्र रूहअफजा को पीना और पिलाना, दोनों से परहेज करें । यह सनातनियों के लिए जहर है। क्यों कि इस्लाम और सनातन धर्म दोनों एक दूसरे से के बिल्कुल उल्टा हैं। और इस्लाम वाले सनातनियों हिंदूओं को काफिर कहते ही नहीं बल्कि मानते भी हैं।
इस नापाक और झूठ से अब सनातनियों हिंदूओं को बिल्कुल निजात दिलाने के भागीरथी मनोरथ का साकार किया गया है।और अब विशुद्ध गंगाजल और गुलाब जल से बना “गीता प्रेस, गीता भवन” द्वारा निर्मित स्वादिष्ट गुलाब के शरबत का ही सेवन करें। और निर्जला एकादशी के दिन इसका वितरण करें ।। हिंदू धर्म के समाज के लिए गंगाजल और गुलाब जल से निर्मित केसर शर्बत और गुलाब शर्बत बनाकर भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य भरा पुनीत पाक काज करके मौजूदा और अगला जन्म भी पवित्र और पाप मुक्त कर दिया है। अब भी आप अपवित्र नापाक और जूठा थूक वाला रूह आफजा और शरबत ए आजम पीकर गंदा करना चाहो तो फिर दोष किसी दूसरे को नहीं देना चाहिए।

