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चंडीगढ़:-10 अगस्त:-आरके विक्रमा शर्मा+करण शर्मा प्रस्तुति:—सांप के काटने पर झाड़ फूँक और पहचान में न करें समय बर्बाद, तुरंत करे ये उपाय और किसी को भी बचा लें।
बरसात के मौसम में सांपों के काटने की घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं, ऐसे में लोगों को यह जानना बहुत ही जरूरी है कि अस्पतालों में इससे बचाव का इंजेक्शन “एंटी स्नेक वेनम सीरम” उपलब्ध है l इसलिए झाड़-फूंक व घरेलू उपचार के चक्कर में पड़कर अपना कीमती समय बर्बाद न करें क्योंकि सांप काटने के बाद झाड़ फूँक मे बिताया समय ही जीवन रक्षा के लिए निर्णायक होता है । इसलिए जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुँचने की कोशिश करनी चाहिए l
गौरतलब है कि दुनिया भर मे सांपों की करीब 2500 से 3000 प्रजातियाँ पायी जाती हैं परंतु सभी प्रजातियाँ जहरीली नहीं होती। तराई क्षेत्रों की बात करें तो मुख्यतः कोब्रा और करईत जहरीले साँप हैं।
वहीं कुछ जगहों में रसेल वाइपर के मिलने की भी खबरें हैं। बरसात के मौसम मे चूहे घरों मे जाकर छुप जाते हैं जिसकी वजह से साँप भी भोजन की तलाश में चूहों या मेढकों के पीछे मकानों में आ घुसते हैं ।
लक्षण –
सांप के काटने पर प्रारंभिक तौर पर करीब-करीब 95 प्रतिशत मामलों में पहला लक्षण नींद का आना होता है। इसके साथ ही निगलने या सांस लेने में तकलीफ होती है। आमतौर पर सांप काटने पर आधे घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
*साँप काटने का करें तुरंत प्राथमिक उपचार: -*
विषैले सांपों के दांत के नीचे विष की थैली होती है। सांप काटने पर थैली के माध्यम से विष सीधे शरीर के खून में फैल जाता है। इसलिए साँप काटने का प्राथमिक उपचार शीघ्र करना चाहिए। इसके लिए काटे हुये स्थान से कुछ ऊपर और नीचे मोटे कपड़े से बाँध देना चाहिए । बांधते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि धमनी मे बह रहे खून का बहाव धीरे हो जाये लेकिन रुके नहीं। क्योंकि बहुत कस कर बांधने से ऊतकों को क्षति पहुँच सकती है इससे गेंगरीन होने की संभावना बढ़ जाती है । बांधने के पश्चात काटे गये स्थान को पानी से धोते रहना चाहिये। यदि घाव में साँप के दाँत रह गए हों, तो उन्हें चिमटी से पकड़कर निकाल लेना चाहिए। ध्यान रहे किसी दशा में भी गरम सिंकाई नहीं करना चाहिए बल्कि इसकी जगह बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।
*झाड़ फूँक और पहचान मे न करें समय बर्बाद :-*
काटने वाला साँप जहरीला था या नहीं सर्प दंश के स्थान को देखकर यह पता लगाया जा सकता है l बिना जहर वाले साँपों के काटने पर कई छोटे गड्ढे सेमी सर्कल में पाये जाते हैं, जबकि जहरीले सांपों में केवल दो गहरे गड्ढे पाये जाते हैं। कुछ जहरीले सांप जैसे करईत के काटने के लक्षण जैसे दोनों विष दाँतों के स्पष्ट निशान, सूजन आदि भी साफ तौर पर दिखाई नहीं देता । करईत सांप मुख्यतः रात में ही काटता है तथा इसका विष कोब्रा की तुलना में अधिक घातक होता है। काटने बाद पेशेन्ट की हालत तेजी से बिगड़ती है और एन्टीस्नेक वेनम का इंजेक्शन न मिलने पर सूर्योदय के समय तक मौत निश्चित हो जाती है। ऐसे में समय का प्रबन्ध मरीज के मामले में जीवन मृत्यु का सवाल बन जाता है.।।
डाँ. कैलाश शर्मा पाटोदा*, सहायक निदेशक, आयुर्वेद विभाग सीकर, राजस्थान का आभार।।

