![]()
चंडीगढ़/पटियाला:- 06 मार्च:- आरके विक्रमा शर्मा करण शर्मा:– मन बहुत चंचल होता है! मन की चंचलता हमारे मस्तिष्क को भी गहरे प्रभावित करती है! लेकिन अगर मन और मस्तिष्क स्थिर है! भटकाव से परे है! और बेफिजूल चिंताओं अभिलाषाओं से ऊपर है! तो यही ध्यान की सही मुद्रा है; यह कहना है पटियाला बाईपास की रहने वाली और मां अष्टभुजी शेरांवाली की उपासिका वंदना गोयल का, जिसने लोक कल्याण को ही अपनी जीवन शैली जीवन चर्या और जीवन का ध्येय बना लिया है।
वंदना गोयल निस्वार्थ भाव से मां शेरांवाली की अनुकंपा से दुखियों रोगियों और कलाह क्लेश से पीड़ितों के लिए मां का आशीर्वाद उन तक पहुंचाने का जरिया बनती हैं। सादगी पसंद वंदना गोयल के पति प्राइवेट सेक्टर में सर्विस करते हैं। और बेटा चिराग पहली कक्षा में पढ़ता है। घर परिवार के तमाम जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करते हुए हर दुखी दरिद्र पर दया भाव बरसाने वाली वंदना गोयल का हालांकि अपना निजी जीवन बिल्कुल शून्य है। लेकिन फिर भी परमार्थ के लिए तत्पर रहने वाले वंदना गोयल का मानना है कि प्रभु के साथ जुड़ने से आपकी उन्नति होती है। सर्वागीण विकास होता है। और आप नकारात्मक दायरों से ऊपर उठकर सकारात्मक शक्तिपुंज बन सकते हैं।
अपनी जिंदगी में नाना प्रकार के अभाव कठिनाइयां परिवारिक परिवेश में विषमताओं आदि को झेलते हुए अपने पैरों पर खड़े होकर अपने मायके को समाज में सम्माननीय समृद्ध स्थान दिलाया है। और मां शेरावाली की अनुकंपा से परोपकारी भावना के चलते मां का सुखद सौहार्दिक आशीर्वाद लोगों तक खासकर दुखियों दरिद्रों तक पहुंचाने का सबब बनी हुई हैं। वंदना गोयल अपने घर पर भी और इच्छुक व मां शेरावाली के आस्था बानो चाहत की रो के घर भी माता की चौकी संपन्न करती हैं और इस सब के एवज में कुछ भी कभी भी कहीं भी कोई भी मांग नहीं करती हैं।। किसी के घर में खुशियां प्रवेश करती हैं। सुख समृद्धि का साम्राज्य बढ़ता है। कलह क्लेश मिटता है। भाईचारा बढ़ता है। सकारात्मक सोच का दायरा बढ़ता है। यही उनके लिए सब कुछ है। धर्ममत सोच रखने वाली वंदना गोयल इस सब का श्रेय अपनी परम आराध्य आदिशक्ति मां शेरांवाली को ही मानती हैं। अनेकों बीमारों, व्यापार में घाटा खाए हुए व पढ़ाई में फिसड्डी रहे और अनेकों दुर्बलताओं कठिनाइयों का सामना करने वालों को भी मां के आशीर्वाद से सही सफलता की राह मुहैया करवाती हैं।

